आयुर्वेदीय द्रव्य

अम्लवेत अम्लवेत

Acidozeyfolia

प्रयोज्य अंग: फल

अम्लवेत — आयुर्वेदीय गुण-कर्म
रसतिक्त (Bitter), कषाय (Astringent)
गुणलघु (Light), रूक्ष (Dry)
वीर्यउष्ण (Hot)
विपाककटु (Pungent)
दोष-कर्मकफ और वात का शमन
प्रभावClassical systemic action

सार-संक्षेप

  • वानस्पतिक नाम: Acidozeyfolia
  • प्रयोज्य अंग: फल
  • दोष-कर्म: कफ और वात का शमन
  • सामान्य मात्रा: जिस योग में यह सम्मिलित है, उसी के भाग के रूप में।

अम्लवेत के अन्य भाषाओं में नाम

अंग्रेज़ीAmalvet
लैटिन (वानस्पतिक)Acidozeyfolia
संस्कृतअम्लवेत

परिचय

अमलवेत एक अम्ल फल-द्रव्य है जो भारतीय परम्परा में दीपन एवं अनुलोमन द्रव्य के रूप में प्रयुक्त होता है — यह अग्नि को प्रदीप्त करता है और वात को अधोगामी करता है।

स्रोत-सामग्री में इसकी वानस्पतिक पहचान अनिश्चित है। यह नाम प्रादेशिक रूप से Garcinia pedunculata, Rumex vesicarius तथा अन्य अम्ल फलों के लिए प्रयुक्त होता है, और निर्माण-पत्रक में दिया गया वानस्पतिक नाम किसी मान्य द्विनाम से मेल नहीं खाता। हमने इसे सत्यापन हेतु चिह्नित किया है, न कि ऐसी पहचान का दावा किया है जिसका हम समर्थन नहीं कर सकते।

वर्गीकरण

वानस्पतिक पहचान सत्यापन-अधीन। व्यवहार में इसे दिए गए गुणों के अनुसार: रस अम्ल; गुण लघु, रूक्ष; वीर्य उष्ण; विपाक अम्ल। वात एवं कफ का शमन; पित्त की वृद्धि।

उपयोग एवं लाभ

अरुचि, उदर-आध्मान तथा मन्दाग्नि में प्रयुक्त, इस शास्त्रीय सिद्धान्त पर कि अम्ल रस दीपन एवं रोचन है। इस संग्रह में यह काङ्कायन वटी के पाचक घटकों में सम्मिलित है।

अग्नि एवं वात हेतु अमलवेत

अम्ल एवं उष्ण होने से वहाँ प्रयुक्त जहाँ पाचन मन्द हो और वायु अवरुद्ध हो — वही तर्क जो पाचक योगों के अन्य अम्ल फल-द्रव्यों का है।

पहचान विषयक टिप्पणी

वानस्पतिक स्रोत निश्चित न होने के कारण यह प्रविष्टि किसी विशिष्ट जाति के विषय में दावा करने के स्थान पर योग में द्रव्य की भूमिका का वर्णन करती है।

मात्रा — कितना लें

जिस योग में यह सम्मिलित है, उसी के भाग के रूप में। वानस्पतिक पुष्टि होने तक यहाँ स्वतन्त्र मात्रा नहीं दी गई है।

मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।

पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर

उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।

आयुर्वेद में अम्लवेत किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?

अरुचि, उदर-आध्मान तथा मन्दाग्नि में प्रयुक्त, इस शास्त्रीय सिद्धान्त पर कि अम्ल रस दीपन एवं रोचन है। इस संग्रह में यह काङ्कायन वटी के पाचक घटकों में सम्मिलित है।

अम्लवेत के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?

रस तिक्त (Bitter), कषाय (Astringent), गुण लघु (Light), रूक्ष (Dry), वीर्य उष्ण (Hot), विपाक कटु (Pungent). दोष-कर्म: कफ और वात का शमन. प्रभाव: Classical systemic action.

अम्लवेत को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?

द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। अम्लवेत का वीर्य उष्ण (Hot) है और विपाक कटु (Pungent) — इसी से इसका कर्म बनता है: कफ और वात का शमन.

अम्लवेत का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?

प्रयोज्य अंग: फल.

अम्लवेत की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?

जिस योग में यह सम्मिलित है, उसी के भाग के रूप में। वानस्पतिक पुष्टि होने तक यहाँ स्वतन्त्र मात्रा नहीं दी गई है। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।

अम्लवेत का प्रयोग कब वर्जित है?

अम्ल एवं उष्ण; पित्त बढ़ाता है तथा अम्लपित्त एवं परिणामशूल में वर्जित है। वानस्पतिक पहचान अपुष्ट होने के कारण इस द्रव्य का प्रयोग केवल अनुज्ञप्त निर्माता के सिद्ध योग के भीतर ही करना चाहिए, खुला क्रय न करें।

अम्लवेत कहाँ पाया जाता है?

वानस्पतिक पुष्टि होने तक अनुल्लिखित।

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • पहचान असत्यापित — Pending botanical confirmation
    निर्माण-पत्रक में दिया गया द्विनाम किसी मान्य नाम से मेल नहीं खाता। इस मोनोग्राफ के पूर्ण होने से पूर्व अभीष्ट जाति की पुष्टि हेतु वैद्य-दल के लिए चिह्नित।

सुरक्षा एवं सावधानियाँ

अम्ल एवं उष्ण; पित्त बढ़ाता है तथा अम्लपित्त एवं परिणामशूल में वर्जित है। वानस्पतिक पहचान अपुष्ट होने के कारण इस द्रव्य का प्रयोग केवल अनुज्ञप्त निर्माता के सिद्ध योग के भीतर ही करना चाहिए, खुला क्रय न करें।

प्राप्ति स्थान

वानस्पतिक पुष्टि होने तक अनुल्लिखित।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वानस्पतिक नाम क्यों नहीं दिया गया?

क्योंकि निर्माण-पत्रक में अंकित नाम किसी मान्य वानस्पतिक द्विनाम से मेल नहीं खाता, और अमलवेत के नाम से प्रादेशिक रूप से कई भिन्न अम्ल फल बिकते हैं। ऐसी पहचान छापने के स्थान पर, जिसके पीछे हम खड़े न हो सकें, हम इसे चिह्नित करना उचित समझते हैं।

क्या इससे योग प्रभावित होता है?

सिद्ध उत्पाद अपने स्वयं के विनिर्देश के अनुसार बनता है। यह पृष्ठ केवल यह नहीं बताता कि घटक किस जाति का है, और उसे पुष्टि हेतु चिह्नित किया गया है।

Consult a registered BAMS Vaidya Consult Us