चित्र: Jorge Barrios / Wikimedia Commons, Public domain
Bhang Beej भांग
Cannabis sativa
अन्य नाम: भांग बीज
प्रयोज्य अंग: बीज
| रस | तिक्त (Bitter), कषाय (Astringent) |
|---|---|
| गुण | लघु (Light), रूक्ष (Dry) |
| वीर्य | उष्ण (Hot) |
| विपाक | कटु (Pungent) |
| दोष-कर्म | कफ और वात का शमन |
| प्रभाव | Classical systemic action |
सार-संक्षेप
- वानस्पतिक नाम: Cannabis sativa
- प्रयोज्य अंग: बीज
- दोष-कर्म: कफ और वात का शमन
- सामान्य मात्रा: केवल पंजीकृत आयुर्वेदीय चिकित्सक के निर्देशानुसार, अनुज्ञप्त योग से।
Bhang Beej के अन्य भाषाओं में नाम
परिचय
भांग Cannabis sativa का बीज है, जिसे शास्त्रों में विजया कहा गया है। आयुर्वेद ने इस वनस्पति का प्रयोग शताब्दियों से कठोर नियन्त्रित योगों में ग्राही, दीपन तथा वेदनाहर द्रव्य के रूप में किया है।
भारत में भांग स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) के अन्तर्गत नियन्त्रित पदार्थ है। इसे धारण करने वाले योगों का निर्माण एवं वितरण केवल अनुज्ञप्ति के अन्तर्गत ही हो सकता है, तथा उनका विक्रय एवं आपूर्ति विधि द्वारा प्रतिबन्धित है। यह पृष्ठ केवल सूचनार्थ है; यह आपूर्ति का प्रस्ताव नहीं है।
वर्गीकरण
कुल कैनाबेसी (Cannabaceae)। इस संग्रह में निर्दिष्ट अंग बीज है। रस: तिक्त, कटु। गुण: लघु, तीक्ष्ण। वीर्य: उष्ण। विपाक: कटु। दोषघ्नता: कफ एवं वात का शमन। उपविष के रूप में वर्गीकृत — शोधन अपेक्षित उप-विष।
उपयोग एवं लाभ
शास्त्रों में अतिसार तथा ग्रहणी में इसके ग्राही कर्म हेतु, अरुचि में, तथा संयुक्त योगों के भीतर वेदनाहर एवं निद्राजनक द्रव्य के रूप में प्रयुक्त। इस संग्रह में यह लक्ष्मीविलास रस में सम्मिलित है। इसका प्रयोग सदैव किसी शास्त्रीय योग के भीतर, चिकित्सक के निर्देश पर होता है — खुले द्रव्य के रूप में कभी नहीं।
शास्त्रीय ग्राही द्रव्य के रूप में विजया
शास्त्र इसे वहाँ प्रयुक्त करते हैं जहाँ जीर्ण द्रव कोष्ठ अन्य द्रव्यों से न रुका हो — किसी योग के भीतर, अल्प शोधित मात्रा में।
प्रतिबन्ध क्यों महत्त्वपूर्ण हैं
भारत में भांग NDPS-नियन्त्रित है। वैध आयुर्वेदीय प्रयोग हेतु अनुज्ञप्त निर्माता तथा पंजीकृत चिकित्सक का नुस्खा आवश्यक है; इसके बाहर कुछ भी, परम्परा होते हुए भी, अवैध है।
मात्रा — कितना लें
केवल पंजीकृत आयुर्वेदीय चिकित्सक के निर्देशानुसार, अनुज्ञप्त योग से। किसी भी मात्रा में स्वयं-चिकित्सा वर्जित।
मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।
पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर
उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।
Bhang Beej का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?
इस संग्रह में Bhang Beej के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: भावप्रकाश निघण्टु (गुडूच्यादि वर्ग — Vijaya).
भावप्रकाश निघण्टु में Bhang Beej के विषय में क्या कहा गया है?
तिक्त रस, उष्ण वीर्य; ग्राही एवं दीपन, उपविषों में वर्गीकृत। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — गुडूच्यादि वर्ग — Vijaya.
आयुर्वेद में Bhang Beej किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?
शास्त्रों में अतिसार तथा ग्रहणी में इसके ग्राही कर्म हेतु, अरुचि में, तथा संयुक्त योगों के भीतर वेदनाहर एवं निद्राजनक द्रव्य के रूप में प्रयुक्त। इस संग्रह में यह लक्ष्मीविलास रस में सम्मिलित है। इसका प्रयोग सदैव किसी शास्त्रीय योग के भीतर, चिकित्सक के निर्देश पर होता है — खुले द्रव्य के रूप में कभी नहीं।
Bhang Beej के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?
रस तिक्त (Bitter), कषाय (Astringent), गुण लघु (Light), रूक्ष (Dry), वीर्य उष्ण (Hot), विपाक कटु (Pungent). दोष-कर्म: कफ और वात का शमन. प्रभाव: Classical systemic action.
Bhang Beej को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?
द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। Bhang Beej का वीर्य उष्ण (Hot) है और विपाक कटु (Pungent) — इसी से इसका कर्म बनता है: कफ और वात का शमन.
Bhang Beej का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?
प्रयोज्य अंग: बीज.
Bhang Beej की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?
केवल पंजीकृत आयुर्वेदीय चिकित्सक के निर्देशानुसार, अनुज्ञप्त योग से। किसी भी मात्रा में स्वयं-चिकित्सा वर्जित। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।
Bhang Beej का प्रयोग कब वर्जित है?
नियन्त्रित पदार्थ — NDPS अधिनियम। अनुज्ञप्ति के बिना आपूर्ति एवं धारण भारत में दण्डनीय अपराध है। चिकित्सकीय दृष्टि से अशोधित अथवा अत्यधिक द्रव्य भ्रम, हृद्गति-वृद्धि, चिन्ता तथा निर्भरता उत्पन्न करता है, और यह गर्भावस्था, स्तनपान, बालकों एवं किशोरों में, तथा मनोविकार अथवा उसका पारिवारिक इतिहास रखने वाले किसी भी व्यक्ति में वर्जित है। वाहन-चालन तथा यन्त्र-संचालन की क्षमता क्षीण करता है।
Bhang Beej कहाँ पाया जाता है?
उप-हिमालयी क्षेत्र भर में स्वतः उगता है और कुछ भारतीय राज्यों में रेशा तथा बीज हेतु अनुज्ञप्ति के अन्तर्गत उगाया जाता है। औषधीय प्रयोग हेतु वन्य संग्रह विनियमित है।
शास्त्रीय सन्दर्भ
- भावप्रकाश निघण्टु — गुडूच्यादि वर्ग — Vijaya
तिक्त रस, उष्ण वीर्य; ग्राही एवं दीपन, उपविषों में वर्गीकृत। - एनडीपीएस अधिनियम, 1985 (भारत) — Regulatory status
भांग नियन्त्रित पदार्थ है; निर्माण एवं वितरण हेतु अनुज्ञप्ति आवश्यक।
सुरक्षा एवं सावधानियाँ
नियन्त्रित पदार्थ — NDPS अधिनियम। अनुज्ञप्ति के बिना आपूर्ति एवं धारण भारत में दण्डनीय अपराध है। चिकित्सकीय दृष्टि से अशोधित अथवा अत्यधिक द्रव्य भ्रम, हृद्गति-वृद्धि, चिन्ता तथा निर्भरता उत्पन्न करता है, और यह गर्भावस्था, स्तनपान, बालकों एवं किशोरों में, तथा मनोविकार अथवा उसका पारिवारिक इतिहास रखने वाले किसी भी व्यक्ति में वर्जित है। वाहन-चालन तथा यन्त्र-संचालन की क्षमता क्षीण करता है।
प्राप्ति स्थान
उप-हिमालयी क्षेत्र भर में स्वतः उगता है और कुछ भारतीय राज्यों में रेशा तथा बीज हेतु अनुज्ञप्ति के अन्तर्गत उगाया जाता है। औषधीय प्रयोग हेतु वन्य संग्रह विनियमित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या भांगयुक्त औषधि बिना नुस्खे के खरीदी जा सकती है?
नहीं। भारत में भांगयुक्त योग NDPS अधिनियम के अन्तर्गत नियन्त्रित हैं और उनके लिए अनुज्ञप्त निर्माता तथा पंजीकृत चिकित्सक का नुस्खा आवश्यक है।
क्या शास्त्रीय प्रयोग विधि से मुक्त है?
नहीं। परम्परागत प्रयोग NDPS अधिनियम को निरस्त नहीं करता। वैध आयुर्वेदीय योग अनुज्ञप्ति के अन्तर्गत बनते हैं और नुस्खे पर ही वितरित होते हैं।