कबाबचीनी, शीतलचीनी (Piper cubeba) — fruit
कबाबचीनी, शीतलचीनी — Piper cubeba. प्रयोज्य अंग: फल.
चित्र: Franz Eugen Köhler, Köhler's Medizinal-Pflanzen / Wikimedia Commons, Public domain
आयुर्वेदीय द्रव्य

कबाबचीनी, शीतलचीनी कक्कोल

Piper cubeba · Piperaceae

अन्य नाम: शीतल चीनी, कबाबचीनी, कंकोल

प्रयोज्य अंग: फल

कबाबचीनी (Piper cubeba) पुच्छयुक्त मरिच है, जो आयुर्वेद में मूत्र एवं श्वसन विकारों हेतु प्रयुक्त होती है। अधिक उष्ण मरिचों के विपरीत यह सुगन्धित तथा केवल मृदु उष्ण है, इसीलिए यह मूत्र-दाह एवं श्वसनिका-शोथ में उपयुक्त बैठती है, जहाँ काली मरिच वृद्धि कर देती।

कबाबचीनी, शीतलचीनी — आयुर्वेदीय गुण-कर्म
रसकटु, तिक्त
गुणलघु, रूक्ष, तीक्ष्ण
वीर्यउष्ण
विपाककटु
दोष-कर्मकफ और वात का शमन
प्रभावUrinary, श्वसन support

सार-संक्षेप

  • वानस्पतिक नाम: Piper cubeba
  • प्रयोज्य अंग: फल
  • दोष-कर्म: कफ और वात का शमन
  • सामान्य मात्रा: फल चूर्ण 0.5–2 ग्राम; मूत्र एवं श्वसन योगों में प्रयुक्त।

कबाबचीनी, शीतलचीनी के अन्य भाषाओं में नाम

हिन्दीकबाबचीनी, शीतलचीनी
अंग्रेज़ीCubeb, Tailed Pepper
संस्कृतकक्कोल, कटुकफल
बंगालीকাবাবচিনি
गुजरातीચણકબાબ
मराठीकंकोळ
तमिलவால்மிளகு
तेलुगुతోకమిరియాలు
कन्नड़ಬಾಲಮೆಣಸು
लैटिन (वानस्पतिक)Piper cubeba

परिचय

कबाबचीनी (Piper cubeba), अर्थात् क्यूबेब, मरिच-कुल का फल है जो मूत्र एवं श्वसन मार्गों हेतु प्रयुक्त होता है। सुगन्धित एवं उष्ण होकर यह कफ का हरण करता है, श्वास-मार्ग को शान्ति देता है और मूत्र-सुविधा को सहारा देता है।

वर्गीकरण

पाइपरेसी (Piperaceae) कुल की कबाबचीनी मूत्र एवं श्वसन कर्म वाले सुगन्धित कफ-वात शामक द्रव्यों में वर्गीकृत है। इसका कटु रस एवं भेदक गुण अवरोध दूर करते हैं।

उपयोग एवं लाभ

कबाबचीनी मूत्र-दाह एवं कष्टयुक्त मूत्र-प्रवाह में, और घने अवरोध सहित कास में प्रयुक्त होती है। इसकी सुगन्धित कटुता उसे मुख-द्रव्य भी बनाती है, जो मुखदुर्गन्ध तथा कण्ठ-क्षोभ में प्रयुक्त होता है, और यह इस संग्रह के शास्त्रीय मूत्र-योगों में सम्मिलित है।

मूत्र-दाह हेतु कबाबचीनी

इसका प्रधान प्रयोग। सुगन्धित एवं मृदु उष्ण होने से यह मूत्राशय-शोथ तथा पूयमेह में मूत्र-मार्ग को शान्ति देती है — यह प्रयोग यूनानी परम्परा से साझा है।

श्वसनिका-शोथ हेतु कबाबचीनी

अवरोध सहित जीर्ण कास में प्रयुक्त; इसके वाष्पशील तैल सीधे श्वसन-मार्ग तक पहुँचते हैं।

मुखदुर्गन्ध हेतु कबाबचीनी

भोजन के पश्चात् सुगन्धित द्रव्य के रूप में चबाई जाती है — पान में इसकी उपस्थिति का पारम्परिक कारण यही है।

अजीर्ण हेतु कबाबचीनी

अरुचि एवं आध्मान हेतु एक मृदु दीपन द्रव्य।

कण्ठ-शूल हेतु कबाबचीनी

स्वरभेद एवं कण्ठ-क्षोभ में गण्डूष के रूप में तथा धीरे-धीरे चूसकर प्रयुक्त।

प्रोस्टेट-विकारों हेतु कबाबचीनी

वृद्ध पुरुषों में कष्टयुक्त मूत्रता हेतु परम्परागत रूप से गोक्षुर के साथ प्रयुक्त।

शिरःशूल हेतु कबाबचीनी

उस शिरःशूल में प्रयुक्त जहाँ मूल कारण अवरोध हो।

अर्श हेतु कबाबचीनी

एक गौण शास्त्रीय संकेत, जो योगों के भीतर लिया जाता है।

यूनानी परम्परा में कबाबचीनी

कबाब चीनी मूत्र एवं श्वसन विकारों हेतु सुस्थापित यूनानी द्रव्य है, और उसी परम्परा से भारतीय व्यवहार में आई।

शास्त्रीय योगों में कबाबचीनी

अनेक मूत्र एवं श्वसन योगों में तथा चन्द्रप्रभा वटी में उपस्थित।

मात्रा — कितना लें

फल चूर्ण 0.5–2 ग्राम; मूत्र एवं श्वसन योगों में प्रयुक्त। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें।

मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।

पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर

उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।

कबाबचीनी, शीतलचीनी का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?

इस संग्रह में कबाबचीनी, शीतलचीनी के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: भावप्रकाश निघण्टु (कर्पूरादि वर्ग).

भावप्रकाश निघण्टु में कबाबचीनी, शीतलचीनी के विषय में क्या कहा गया है?

मूत्र एवं श्वसन कर्म सहित सुगन्धित द्रव्य के रूप में वर्णित। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — कर्पूरादि वर्ग.

आयुर्वेद में कबाबचीनी, शीतलचीनी किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?

कबाबचीनी मूत्र-दाह एवं कष्टयुक्त मूत्र-प्रवाह में, और घने अवरोध सहित कास में प्रयुक्त होती है। इसकी सुगन्धित कटुता उसे मुख-द्रव्य भी बनाती है, जो मुखदुर्गन्ध तथा कण्ठ-क्षोभ में प्रयुक्त होता है, और यह इस संग्रह के शास्त्रीय मूत्र-योगों में सम्मिलित है।

कबाबचीनी, शीतलचीनी के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?

रस कटु, तिक्त, गुण लघु, रूक्ष, तीक्ष्ण, वीर्य उष्ण, विपाक कटु. दोष-कर्म: कफ और वात का शमन. प्रभाव: Urinary, श्वसन support.

कबाबचीनी, शीतलचीनी को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?

द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। कबाबचीनी, शीतलचीनी का वीर्य उष्ण है और विपाक कटु — इसी से इसका कर्म बनता है: कफ और वात का शमन.

कबाबचीनी, शीतलचीनी का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?

प्रयोज्य अंग: फल.

कबाबचीनी, शीतलचीनी की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?

फल चूर्ण 0.5–2 ग्राम; मूत्र एवं श्वसन योगों में प्रयुक्त। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।

कबाबचीनी, शीतलचीनी का प्रयोग कब वर्जित है?

शास्त्रोक्त/पाक मात्रा में सामान्यतः सुरक्षित।

कबाबचीनी, शीतलचीनी कहाँ पाया जाता है?

क्यूबेब आर्द्र उष्णकटिबन्ध की आरोही लता है, जो भारत तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ भागों में उगाई जाती है।

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भावप्रकाश निघण्टु — कर्पूरादि वर्ग
    मूत्र एवं श्वसन कर्म सहित सुगन्धित द्रव्य के रूप में वर्णित।
  • शास्त्रीय मूत्र एवं कास ग्रन्थ — —
    मूत्र एवं श्वसन सहायता हेतु उल्लिखित।

Modern research

  1. Cubeb (Piper cubeba L.f.): A comprehensive review of its botany, phytochemistry, traditional uses, and pharmacological properties (see source). Frontiers in Nutrition (2022)

    A comprehensive review of Piper cubeba (Kababchini / cubeb) documenting antimicrobial, anti-inflammatory and urinary/respiratory pharmacology, driven by lignans such as cubebin.

    View study doi:10.3389/fnut.2022.1048520

सुरक्षा एवं सावधानियाँ

शास्त्रोक्त/पाक मात्रा में सामान्यतः सुरक्षित।

प्राप्ति स्थान

क्यूबेब आर्द्र उष्णकटिबन्ध की आरोही लता है, जो भारत तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ भागों में उगाई जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कबाबचीनी किसमें प्रयुक्त होती है?

क्यूबेब मूत्र-दाह एवं मूत्र-संक्रमण, जीर्ण श्वसनिका-शोथ, कण्ठ-शूल, मुखदुर्गन्ध तथा अजीर्ण में प्रयुक्त होती है। यह काली मरिच से मृदुतर एवं अधिक सुगन्धित है, इसीलिए दाहयुक्त विकारों में उपयुक्त बैठती है।

कबाबचीनी की मात्रा क्या है?

फल चूर्ण प्रतिदिन 1–3 ग्राम मधु अथवा उष्ण जल के साथ। यह प्रायः किसी योग के भीतर ली जाती है। भोजन के पश्चात् एक-दो दाने चबाना पारम्परिक सुगन्धित प्रयोग है।

क्या क्यूबेब और काली मरिच एक ही हैं?

नहीं। क्यूबेब Piper cubeba है, जो प्रत्येक दाने पर लगे छोटे डंठल या "पूँछ" से पहचानी जाती है। यह Piper nigrum की तुलना में अधिक सुगन्धित, कम कटु तथा प्रभाव में मृदु शीत है। वे परस्पर विनिमेय नहीं हैं।

कबाबचीनी को हिन्दी में क्या कहते हैं?

कबाबचीनी अथवा शीतल चीनी। अंग्रेज़ी में इसे क्यूबेब, टेल्ड पेपर अथवा जावा पेपर कहते हैं।

कबाबचीनी किसे नहीं लेनी चाहिए?

गर्भावस्था में औषधीय मात्रा वर्जित। वृक्क-रोग होने पर परामर्श लें, क्योंकि यह मूत्र-मार्ग पर कार्य करती है, अथवा शोथयुक्त आन्त्र-विकार होने पर। बड़ी मात्रा आमाशय में क्षोभ कर सकती है।

क्या क्यूबेब मूत्र-संक्रमण में सहायक है?

आयुर्वेदीय तथा यूनानी, दोनों परम्पराओं में मूत्र-दाह एवं मूत्र-संक्रमण हेतु इसका दीर्घ अभिलेख है। पुष्ट जीवाणु-संक्रमण को उचित चिकित्सा चाहिए — क्यूबेब को सहायक ही मानें, विशेषतः ज्वर अथवा कटि-शूल होने पर।

क्या कबाबचीनी प्रतिदिन ली जा सकती है?

भोजन के पश्चात् कभी-कभार सुगन्धित द्रव्य के रूप में, हाँ। औषधीय मात्रा में इसे अनिश्चित काल तक नहीं, अपितु किसी विशिष्ट व्याधि हेतु कुछ सप्ताहों के क्रम में लिया जाता है।

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