Aam Ki Guthli (Mangifera indica) — stem bark
Aam Ki Guthli — Mangifera indica. प्रयोज्य अंग: Stem Bark, Endocarp (Seed Kernel), Seed Kernel.
चित्र: Forest and Kim Starr / Wikimedia Commons, CC BY 3.0 us
आयुर्वेदीय द्रव्य

Aam Ki Guthli आम

Mangifera indica

अन्य नाम: आम की गुठली

प्रयोज्य अंग: Stem Bark, Endocarp (Seed Kernel), Seed Kernel

Aam Ki Guthli — आयुर्वेदीय गुण-कर्म
रसतिक्त (Bitter), कषाय (Astringent)
गुणलघु (Light), रूक्ष (Dry)
वीर्यउष्ण (Hot)
विपाककटु (Pungent)
दोष-कर्मकफ और वात का शमन
प्रभावClassical systemic action

सार-संक्षेप

  • वानस्पतिक नाम: Mangifera indica
  • प्रयोज्य अंग: Stem Bark, Endocarp (Seed Kernel), Seed Kernel
  • दोष-कर्म: कफ और वात का शमन
  • सामान्य मात्रा: बीज-मज्जा चूर्ण प्रतिदिन 1–3 ग्राम, मधु अथवा तक्र के साथ; त्वक् क्वाथ 40–60 मिली, अथवा बाह्य प्रक्षालन हेतु।

Aam Ki Guthli के अन्य भाषाओं में नाम

अंग्रेज़ीAam
लैटिन (वानस्पतिक)Mangifera indica
संस्कृतआम
हिन्दीAam Ki Guthli

परिचय

आम (Mangifera indica) का आयुर्वेद में केवल फल ही नहीं, वृक्ष का कहीं अधिक भाग प्रयुक्त होता है। काण्ड-त्वक्, पत्र तथा सर्वोपरि बीज-मज्जा — ये ही औषधीय अंग हैं।

ये सभी कषाय हैं। विशेषतः बीज-मज्जा एक शास्त्रीय ग्राही एवं रक्तस्तम्भक द्रव्य है, जो अतिसार तथा रक्तस्राव में प्रयुक्त होता है, और इस संग्रह के योगों में यही अंग निर्दिष्ट है।

वर्गीकरण

कुल एनाकार्डिएसी (Anacardiaceae)। काण्ड-त्वक् तथा बीज-मज्जा औषधीय हैं। रस: कषाय, मधुर, अम्ल। गुण: लघु, रूक्ष। वीर्य: शीत। विपाक: कटु। दोषघ्नता: कफ एवं पित्त का शमन।

उपयोग एवं लाभ

बीज-मज्जा अतिसार, प्रवाहिका, रक्तार्श तथा अत्यधिक रजःस्राव में दी जाती है। त्वक् का क्वाथ शिथिल एवं रक्तस्रावी मसूड़ों हेतु कवल के रूप में तथा व्रणों पर लगाया जाता है। इस संग्रह में बीज-मज्जा अशोकारिष्ट में और त्वक् चन्दनासव में सम्मिलित है।

अतिसार में आम की गुठली

अत्यन्त कषाय होने से गुठली का चूर्ण अतिसार एवं प्रवाहिका को रोकता है और इसके लिए यह शास्त्रोक्त गृह-औषधियों में से एक है।

मसूड़ों एवं व्रणों हेतु आम की त्वक्

क्वाथ रक्तस्रावी, शिथिल मसूड़ों में गण्डूष के रूप में तथा देर से भरने वाले व्रणों के प्रक्षालन हेतु प्रयुक्त होता है।

मात्रा — कितना लें

बीज-मज्जा चूर्ण प्रतिदिन 1–3 ग्राम, मधु अथवा तक्र के साथ; त्वक् क्वाथ 40–60 मिली, अथवा बाह्य प्रक्षालन हेतु।

मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।

पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर

उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।

Aam Ki Guthli का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?

इस संग्रह में Aam Ki Guthli के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: सुश्रुत संहिता (सूत्रस्थान — न्यग्रोधादि गण); भावप्रकाश निघण्टु (आम्रादि फलवर्ग — Amra).

सुश्रुत संहिता में Aam Ki Guthli के विषय में क्या कहा गया है?

व्रण तथा स्राव में प्रयुक्त कषाय द्रव्यों के साथ वर्गीकृत। सन्दर्भ: सुश्रुत संहिता — सूत्रस्थान — न्यग्रोधादि गण.

भावप्रकाश निघण्टु में Aam Ki Guthli के विषय में क्या कहा गया है?

कषाय रस, शीत वीर्य; मज्जा ग्राही एवं रक्तस्तम्भक बताई गई है। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — आम्रादि फलवर्ग — Amra.

आयुर्वेद में Aam Ki Guthli किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?

बीज-मज्जा अतिसार, प्रवाहिका, रक्तार्श तथा अत्यधिक रजःस्राव में दी जाती है। त्वक् का क्वाथ शिथिल एवं रक्तस्रावी मसूड़ों हेतु कवल के रूप में तथा व्रणों पर लगाया जाता है। इस संग्रह में बीज-मज्जा अशोकारिष्ट में और त्वक् चन्दनासव में सम्मिलित है।

Aam Ki Guthli के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?

रस तिक्त (Bitter), कषाय (Astringent), गुण लघु (Light), रूक्ष (Dry), वीर्य उष्ण (Hot), विपाक कटु (Pungent). दोष-कर्म: कफ और वात का शमन. प्रभाव: Classical systemic action.

Aam Ki Guthli को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?

द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। Aam Ki Guthli का वीर्य उष्ण (Hot) है और विपाक कटु (Pungent) — इसी से इसका कर्म बनता है: कफ और वात का शमन.

Aam Ki Guthli का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?

प्रयोज्य अंग: Stem Bark, Endocarp (Seed Kernel), Seed Kernel.

Aam Ki Guthli की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?

बीज-मज्जा चूर्ण प्रतिदिन 1–3 ग्राम, मधु अथवा तक्र के साथ; त्वक् क्वाथ 40–60 मिली, अथवा बाह्य प्रक्षालन हेतु। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।

Aam Ki Guthli का प्रयोग कब वर्जित है?

सुसह्य। अत्यन्त कषाय होने के कारण दीर्घ प्रयोग से विबन्ध हो सकता है। ताज़ा निर्यास तथा कच्चे फल का छिलका संवेदनशील त्वचा में क्षोभ कर सकता है — आम उसी कुल का है जिसका पॉइज़न आइवी, अतः कुछ व्यक्तियों में प्रति-क्रिया देखी जाती है।

Aam Ki Guthli कहाँ पाया जाता है?

सम्पूर्ण भारत में कृषि की जाती है और यह उपमहाद्वीप के सर्वाधिक उगाए जाने वाले फल-वृक्षों में है; औषधीय द्रव्य फल-संचयन का उपोत्पाद है।

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भावप्रकाश निघण्टु — आम्रादि फलवर्ग — Amra
    कषाय रस, शीत वीर्य; मज्जा ग्राही एवं रक्तस्तम्भक बताई गई है।
  • सुश्रुत संहिता — सूत्रस्थान — न्यग्रोधादि गण
    व्रण तथा स्राव में प्रयुक्त कषाय द्रव्यों के साथ वर्गीकृत।

सुरक्षा एवं सावधानियाँ

सुसह्य। अत्यन्त कषाय होने के कारण दीर्घ प्रयोग से विबन्ध हो सकता है। ताज़ा निर्यास तथा कच्चे फल का छिलका संवेदनशील त्वचा में क्षोभ कर सकता है — आम उसी कुल का है जिसका पॉइज़न आइवी, अतः कुछ व्यक्तियों में प्रति-क्रिया देखी जाती है।

प्राप्ति स्थान

सम्पूर्ण भारत में कृषि की जाती है और यह उपमहाद्वीप के सर्वाधिक उगाए जाने वाले फल-वृक्षों में है; औषधीय द्रव्य फल-संचयन का उपोत्पाद है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आम का कौन-सा अंग औषधि है?

मुख्यतः बीज-मज्जा, और गौणतः काण्ड-त्वक् तथा पत्र। गूदा आहार है, औषधि नहीं।

क्या अतिसार में आम की गुठली घर पर ली जा सकती है?

यह एक पारम्परिक गृह-औषधि है, किन्तु दीर्घकालीन अतिसार — विशेषतः रक्त अथवा ज्वर सहित — स्वयं-चिकित्सा नहीं, चिकित्सकीय परीक्षण चाहता है।

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