कमल (Nelumbo nucifera) — flower
कमल — Nelumbo nucifera. प्रयोज्य अंग: पुष्प, बीज.
चित्र: Peripitus / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0
आयुर्वेदीय द्रव्य

कमल कमल

Nelumbo nucifera · Nelumbonaceae

अन्य नाम: कमल, पद्म, कमल फूल, श्वेत कमल, कमल सत्त्व

प्रयोज्य अंग: पुष्प, बीज

कमल (Nelumbo nucifera) पवित्र कमल है, जिसका लगभग प्रत्येक अंग प्रयुक्त होता है। आयुर्वेद पुष्प, केसर, बीज तथा प्रकन्द को रक्तस्राव, दाह, अतिसार एवं हृदय हेतु शीत, कषाय द्रव्यों के रूप में प्रयुक्त करता है। बीज एक रसायन है और प्रकन्द शाक के रूप में खाया जाता है।

कमल — आयुर्वेदीय गुण-कर्म
रसकषाय, मधुर, तिक्त
गुणलघु, स्निग्ध
वीर्यशीत
विपाकमधुर
दोष-कर्मपित्त और कफ का शमन
प्रभाववर्ण्य, हृद्य, शीतल

सार-संक्षेप

  • वानस्पतिक नाम: Nelumbo nucifera
  • प्रयोज्य अंग: पुष्प, बीज
  • दोष-कर्म: पित्त और कफ का शमन
  • सामान्य मात्रा: बीज, केसर अथवा प्रकन्द आहार रूप में या योगों में; कमल-बीज तथा केसर चूर्ण सामान्य हैं।

कमल के अन्य भाषाओं में नाम

हिन्दीकमल
अंग्रेज़ीSacred Lotus
संस्कृतकमल, पद्म
बंगालीপদ্ম
गुजरातीકમળ
मराठीकमळ
तमिलதாமரை
तेलुगुకమలం
कन्नड़ಕಮಲ
लैटिन (वानस्पतिक)Nelumbo nucifera

परिचय

कमल (Nelumbo nucifera) वह पवित्र कमल है जिसके बीज, केसर तथा प्रकन्द शीत, पोषक एवं हृदय-हितकर हैं। मधुर एवं कषाय होकर यह पित्त को शान्त करता है, वर्ण को सहारा देता है और मन को स्थिर करता है।

वर्गीकरण

नेलम्बोनेसी (Nelumbonaceae) कुल का कमल वर्ण्य तथा हृद्य द्रव्यों में वर्गीकृत है। इसका मधुर-कषाय रस एवं शीत वीर्य पित्त तथा कफ का शमन करते हैं और धातुओं को शान्ति देते हैं।

उपयोग एवं लाभ

कमल एक शीत पित्त-द्रव्य है। पुष्प एवं केसर रक्तस्राव-विकारों, दाह तथा अत्यधिक तृष्णा में प्रयुक्त होते हैं; शास्त्र इसे हृद्य, अर्थात् हृदय हेतु हितकर, तथा वर्ण्य भी कहते हैं। यह चन्दन एवं उशीर के साथ शीत आसवों में सम्मिलित रहता है।

रक्तस्राव-विकारों हेतु कमल

पुष्प एवं केसर शास्त्रोक्त रक्तस्तम्भक द्रव्य हैं, जो रक्तपित्त तथा अत्यधिक रजःस्राव में प्रयुक्त होते हैं।

दाह हेतु कमल

सर्वत्र शीत होने से तृष्णा एवं अस्थिरता सहित दाह में प्रयुक्त।

रसायन के रूप में कमल-बीज

बीज पोषक एवं शीत है, जो रोगोत्तर पुनर्लाभ में तथा सामान्य बल्य के रूप में लिया जाता है।

अतिसार हेतु कमल

प्रकन्द एवं बीज कषाय हैं और द्रव मल रोकने हेतु प्रयुक्त होते हैं।

हृदय हेतु कमल

हृद्य कहा गया है; वहाँ प्रयुक्त जहाँ उष्णता एवं चिन्ता के साथ धड़कन हो।

त्वचा हेतु कमल

पुष्प का लेप दाह, वर्ण-दोष तथा शोथयुक्त त्वचा पर लगाया जाता है।

श्वेतप्रदर हेतु कमल

अपने कषाय, शीत कर्म के आधार पर श्वेत स्राव में प्रयुक्त।

मन हेतु कमल

अस्थिरता तथा भंग निद्रा में परम्परागत रूप से प्रयुक्त, विशेषतः पित्त-प्रकृति में।

आहार के रूप में कमल-प्रकन्द

कमल-कक्षी भारत तथा चीन भर में खाई जाती है और वस्तुतः पोषक होने के साथ किंचित् कषाय भी है।

शास्त्रीय योगों में कमल

चन्दनासव, उशीरासव तथा अधिकांश शीत एवं रक्तस्राव योगों में उपस्थित।

मात्रा — कितना लें

बीज, केसर अथवा प्रकन्द आहार रूप में या योगों में; कमल-बीज तथा केसर चूर्ण सामान्य हैं। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें।

मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।

पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर

उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।

कमल का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?

इस संग्रह में कमल के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: चरक संहिता (रक्तपित्त प्रकरण); भावप्रकाश निघण्टु (पुष्पवर्ग).

चरक संहिता में कमल के विषय में क्या कहा गया है?

रक्तस्राव हेतु शीत द्रव्यों में उल्लिखित। सन्दर्भ: चरक संहिता — रक्तपित्त प्रकरण.

भावप्रकाश निघण्टु में कमल के विषय में क्या कहा गया है?

शीत, वर्ण्य एवं हृद्य के रूप में वर्णित। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — पुष्पवर्ग.

आयुर्वेद में कमल किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?

कमल एक शीत पित्त-द्रव्य है। पुष्प एवं केसर रक्तस्राव-विकारों, दाह तथा अत्यधिक तृष्णा में प्रयुक्त होते हैं; शास्त्र इसे हृद्य, अर्थात् हृदय हेतु हितकर, तथा वर्ण्य भी कहते हैं। यह चन्दन एवं उशीर के साथ शीत आसवों में सम्मिलित रहता है।

कमल के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?

रस कषाय, मधुर, तिक्त, गुण लघु, स्निग्ध, वीर्य शीत, विपाक मधुर. दोष-कर्म: पित्त और कफ का शमन. प्रभाव: वर्ण्य, हृद्य, शीतल.

कमल को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?

द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। कमल का वीर्य शीत है और विपाक मधुर — इसी से इसका कर्म बनता है: पित्त और कफ का शमन.

कमल का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?

प्रयोज्य अंग: पुष्प, बीज.

कमल की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?

बीज, केसर अथवा प्रकन्द आहार रूप में या योगों में; कमल-बीज तथा केसर चूर्ण सामान्य हैं। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।

कमल का प्रयोग कब वर्जित है?

अत्यन्त सुरक्षित; आहार एवं औषधि, दोनों रूपों में व्यापक प्रयोग।

कमल कहाँ पाया जाता है?

कमल भारत भर के तालाबों तथा मन्द जलाशयों में उगता है; इसके पुष्प प्रत्येक प्रातः जल-सतह से ऊपर उठते हैं।

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भावप्रकाश निघण्टु — पुष्पवर्ग
    शीत, वर्ण्य एवं हृद्य के रूप में वर्णित।
  • चरक संहिता — रक्तपित्त प्रकरण
    रक्तस्राव हेतु शीत द्रव्यों में उल्लिखित।

Modern research

  1. Lotus seeds (Nelumbinis semen) as an emerging therapeutic seed: A comprehensive review (see source). Food Science & Nutrition (2021)

    A comprehensive review of Nelumbo nucifera (Kamala / lotus) documenting its antioxidant, anti-obesity, cardiovascular-protective and calming pharmacology.

    View study doi:10.1002/fsn3.2313

सुरक्षा एवं सावधानियाँ

अत्यन्त सुरक्षित; आहार एवं औषधि, दोनों रूपों में व्यापक प्रयोग।

प्राप्ति स्थान

कमल भारत भर के तालाबों तथा मन्द जलाशयों में उगता है; इसके पुष्प प्रत्येक प्रातः जल-सतह से ऊपर उठते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कमल के कौन-से अंग औषधीय रूप से प्रयुक्त होते हैं?

लगभग सभी। रक्तस्राव एवं दाह हेतु पुष्प तथा केसर, शीत रसायन के रूप में बीज, अतिसार हेतु तथा आहार के रूप में प्रकन्द, और आवरण एवं मृदु कषाय के रूप में पत्र। प्रत्येक अंग का बल किंचित् भिन्न है।

कमल की मात्रा क्या है?

पुष्प अथवा केसर चूर्ण प्रतिदिन 1–3 ग्राम, बीज चूर्ण 3–6 ग्राम, अथवा क्वाथ 40–80 मिली। प्रकन्द शाक के रूप में मात्रा-सीमा के बिना खाया जाता है।

क्या कमल-बीज हितकर है?

यह पोषक, शीत एवं सुपाच्य है, जो आयुर्वेद में पुनर्लाभ के समय रसायन के रूप में प्रयुक्त होता है। मखाना, जो फूले कमल-बीज के रूप में बिकता है, Euryale ferox से आता है — नाम की समानता के बावजूद वह भिन्न वनस्पति है।

क्या कमल अत्यधिक रजःस्राव में सहायक है?

पुष्प एवं केसर शास्त्रोक्त रक्तस्तम्भक द्रव्य हैं जो अत्यधिक रजःस्राव में प्रयुक्त होते हैं, प्रायः अशोक एवं लोध्र सहित किसी योग के भीतर। दीर्घकालीन अत्यधिक रक्तस्राव में चिकित्सकीय जाँच आवश्यक है।

कमल को हिन्दी में क्या कहते हैं?

कमल। अंग्रेज़ी में सेक्रेड लोटस अथवा इण्डियन लोटस। ध्यान रहे कि कमला नाम एक पूर्णतः भिन्न द्रव्य Mallotus philippensis का भी है, जो कृमि हेतु प्रयुक्त होता है — वानस्पतिक नाम अवश्य देखें।

क्या कमल के दुष्प्रभाव हैं?

अत्यन्त सुसह्य; अधिकांश अंग आहार हैं। यह शीत एवं कषाय है, अतः अधिक प्रयोग शीत, अवरुद्ध अवस्था के अनुकूल न हो सकता। औषधीय मात्रा हेतु गर्भावस्था में चिकित्सक से परामर्श लें।

क्या कमल और कुमुदिनी एक ही हैं?

नहीं, यद्यपि इनमें निरन्तर भ्रम होता है। कमल Nelumbo nucifera है, जिसके पत्ते जल से ऊपर रहते हैं। कुमुदिनी Nymphaea है, जिसके पत्ते जल-सतह पर तैरते हैं — वही नीलोत्पल है, एक पृथक् द्रव्य जिसका अपना पृष्ठ है।

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