चित्र: Sanjay Acharya / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0
उड़द, माष माष
Vigna mungo · Fabaceae
अन्य नाम: उड़द, माष
प्रयोज्य अंग: बीज
माष (Vigna mungo) उड़द की दाल है, एक मुख्य दलहन जिसे आयुर्वेद गम्भीर औषधि भी मानता है। यह दलहनों में सर्वाधिक गुरु एवं पोषक है, जो बल, वात-व्याधियों तथा प्रजनन-ओज में प्रयुक्त होती है, और महामाष तैल का आधार है।
| रस | मधुर |
|---|---|
| गुण | गुरु, स्निग्ध |
| वीर्य | उष्ण |
| विपाक | मधुर |
| दोष-कर्म | वात का शमन |
| प्रभाव | बल्य, वृष्य (strength, vigour) |
सार-संक्षेप
- वानस्पतिक नाम: Vigna mungo
- प्रयोज्य अंग: बीज
- दोष-कर्म: वात का शमन
- सामान्य मात्रा: आहार (दाल) के रूप में, तथा वात/स्नायु अवस्थाओं हेतु माषबलादि जैसे योगों में।
उड़द, माष के अन्य भाषाओं में नाम
परिचय
माष (उड़द, Vigna mungo) आयुर्वेद में दलहनों में सर्वाधिक पोषक है — एक वातशामक, बलवर्धक तथा वृष्य आहार। गुरु एवं स्निग्ध होकर यह मांस बनाता है, स्नायुओं को सहारा देता है और ओज पुनः स्थापित करता है।
वर्गीकरण
फैबेसी (Fabaceae) कुल का माष बल्य तथा वृष्य द्रव्यों में वर्गीकृत है। इसका मधुर रस, गुरु-स्निग्ध गुण एवं उष्ण वीर्य पोषण करते हैं और वात का शमन करते हैं।
उपयोग एवं लाभ
उड़द एक बृंहण एवं वृष्य आहार-द्रव्य है, जो क्षय एवं दुर्बलता में धातु बनाने तथा वात-व्याधियों में स्नायुओं को बल देने हेतु प्रयुक्त होता है। इसका प्रधान औषधीय प्रयोग बाह्य है — पक्षाघात, अर्दित तथा तीव्र वात-शूल हेतु महामाष तैल के आधार के रूप में।
बल हेतु माष
दलहनों में सर्वाधिक बल्य — गुरु, स्निग्ध एवं पोषक, जो कार्श्य में तथा मांस-वृद्धि हेतु प्रयुक्त होता है।
वात-व्याधियों हेतु माष
इसका गुरुत्व एवं स्निग्धता उसे वात हेतु शास्त्रोक्त दलहन बनाते हैं, जो सन्धि-शूल तथा स्नायु-विकारों में प्रयुक्त होता है।
वृष्य द्रव्य के रूप में माष
प्रजनन-बल्य द्रव्यों में नामित तथा शास्त्रीय वाजीकरण कल्पों में प्रयुक्त।
महामाष तैल में माष
अर्दित, स्नायु-शूल तथा शिर की वात-व्याधियों में प्रयुक्त शास्त्रीय तैल का आधार।
विबन्ध हेतु माष
इसकी स्निग्धता रूक्ष कोष्ठ को गति देती है, और यह वहाँ प्रयुक्त होता है जहाँ वातज विबन्ध प्रधान हो।
स्तन्य हेतु माष
भारत भर में स्तनपान कराने वाली माताओं को परम्परागत रूप से दिया जाने वाला स्तन्यजनन द्रव्य।
सन्धि-शूल हेतु माष
शूलयुक्त सन्धियों पर उष्ण पुल्टिस के रूप में बाह्य रूप से लगाया जाता है, तथा वातज सन्धिवात में आन्तरिक रूप से लिया जाता है।
वज़न बढ़ाने हेतु माष
जहाँ लक्ष्य घटाना नहीं, बढ़ाना हो, वहाँ यह शास्त्रोक्त आहारीय चयन है।
त्वचा हेतु माष
पिसा उड़द-चूर्ण पारम्परिक शोधक एवं मृदुकारी लेप है, विशेषतः रूक्ष त्वचा हेतु।
अर्श हेतु माष
अर्श में वहाँ प्रयुक्त जहाँ कठोर मल अवस्था को बढ़ाता हो।
मात्रा — कितना लें
आहार (दाल) के रूप में, तथा वात/स्नायु अवस्थाओं हेतु माषबलादि जैसे योगों में। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें।
मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।
पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर
उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।
उड़द, माष का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?
इस संग्रह में उड़द, माष के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: चरक संहिता (वात एवं Vrishya प्रकरण); भावप्रकाश निघण्टु (धान्य वर्ग).
चरक संहिता में उड़द, माष के विषय में क्या कहा गया है?
बलवर्धक आहारों में उल्लिखित। सन्दर्भ: चरक संहिता — वात एवं Vrishya प्रकरण.
भावप्रकाश निघण्टु में उड़द, माष के विषय में क्या कहा गया है?
बल्य एवं वृष्य के रूप में वर्णित। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — धान्य वर्ग.
आयुर्वेद में उड़द, माष किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?
उड़द एक बृंहण एवं वृष्य आहार-द्रव्य है, जो क्षय एवं दुर्बलता में धातु बनाने तथा वात-व्याधियों में स्नायुओं को बल देने हेतु प्रयुक्त होता है। इसका प्रधान औषधीय प्रयोग बाह्य है — पक्षाघात, अर्दित तथा तीव्र वात-शूल हेतु महामाष तैल के आधार के रूप में।
उड़द, माष के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?
रस मधुर, गुण गुरु, स्निग्ध, वीर्य उष्ण, विपाक मधुर. दोष-कर्म: वात का शमन. प्रभाव: बल्य, वृष्य (strength, vigour).
उड़द, माष को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?
द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। उड़द, माष का वीर्य उष्ण है और विपाक मधुर — इसी से इसका कर्म बनता है: वात का शमन.
उड़द, माष का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?
प्रयोज्य अंग: बीज.
उड़द, माष की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?
आहार (दाल) के रूप में, तथा वात/स्नायु अवस्थाओं हेतु माषबलादि जैसे योगों में। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।
उड़द, माष का प्रयोग कब वर्जित है?
पचने में गुरु — अग्नि क्षीण हो अथवा कफ अधिक हो तो संयम से प्रयोग करें।
उड़द, माष कहाँ पाया जाता है?
उड़द भारत भर में उगाई जाने वाली दलहन फ़सल है, जो अनेक प्रादेशिक पाक-परम्पराओं का आधार है।
शास्त्रीय सन्दर्भ
- भावप्रकाश निघण्टु — धान्य वर्ग
बल्य एवं वृष्य के रूप में वर्णित। - चरक संहिता — वात एवं Vrishya प्रकरण
बलवर्धक आहारों में उल्लिखित।
Modern research
-
Vigna mungo (Linn.) Hepper: ethnobotanical, pharmacological, phytochemical, and nutritious profile
(see source). Phytochemistry Reviews (2024)
A comprehensive review of Vigna mungo (Masha / black gram) documenting its antioxidant, anti-inflammatory, aphrodisiac, nootropic and nutritive pharmacology.
View study doi:10.1007/s11101-024-09972-6
सुरक्षा एवं सावधानियाँ
पचने में गुरु — अग्नि क्षीण हो अथवा कफ अधिक हो तो संयम से प्रयोग करें।
प्राप्ति स्थान
उड़द भारत भर में उगाई जाने वाली दलहन फ़सल है, जो अनेक प्रादेशिक पाक-परम्पराओं का आधार है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आयुर्वेद में माष किसमें प्रयुक्त होता है?
उड़द बल एवं वज़न-वृद्धि, सन्धि तथा स्नायु-शूल सहित वात-व्याधियों, प्रजनन-ओज, विबन्ध एवं स्तन्य हेतु प्रयुक्त होता है। यह महामाष तैल का आधार है, जो अर्दित तथा स्नायु-विकारों हेतु शास्त्रीय तैल है।
क्या उड़द दाल स्वास्थ्य हेतु हितकर है या अहितकर?
प्रकृति के अनुसार दोनों। यह सर्वाधिक गुरु एवं पोषक दलहन है — वात-प्रकृति तथा बल-निर्माण हेतु उत्तम, किन्तु कफ बढ़ाती है और क्षीण अग्नि पर भारी पड़ती है। इसे उष्ण, भली-भाँति पकी एवं मसालेदार खाएँ।
माष की मात्रा क्या है?
आहार के रूप में मात्रा-सीमा के बिना। औषधि के रूप में बीज चूर्ण 3–6 ग्राम, अथवा योगों एवं तैलों के भीतर। बाह्य रूप से पुल्टिस या चूर्ण-लेप के रूप में आवश्यकतानुसार।
उड़द किसे नहीं खानी चाहिए?
मन्दाग्नि, अधिक कफ, वातरक्त अथवा वृक्क-अश्मरी का इतिहास रखने वाले किसी भी व्यक्ति को — यह गुरु एवं प्यूरिन-समृद्ध है। रात्रि में भी इससे बचना श्रेष्ठ है, जब पाचन सर्वाधिक क्षीण होता है।
त्वचा पर उड़द-चूर्ण क्यों प्रयुक्त होता है?
पिसा उड़द पारम्परिक शोधक एवं मृदुकारी लेप है, जो उबटन में बेसन की भाँति प्रयुक्त होता है। यह स्वाभाविक स्नेह हटाए बिना शोधन करता है, जो रूक्ष त्वचा हेतु साबुन से श्रेष्ठ है।
महामाष तैल किसमें प्रयुक्त होता है?
उड़द पर बना एक शास्त्रीय सिद्ध तैल, जो अर्दित, स्नायु-शूल, सन्धि-जकड़न तथा शिर एवं ग्रीवा की वात-व्याधियों में बाह्य रूप से प्रयुक्त होता है। इसे उष्ण करके लगाया जाता है।
क्या माष मांस-वृद्धि हेतु अच्छा है?
यह शास्त्रोक्त बल्य दलहन है और परम्परागत रूप से वज़न एवं बल बढ़ाने हेतु घृत तथा दूध के साथ लिया जाता है। इसकी प्रोटीन-मात्रा इस पारम्परिक प्रयोग का समर्थन करती है, यद्यपि यह गुरु है और अवशोषण हेतु उत्तम पाचन चाहिए।