तुलसी (Ocimum tenuiflorum) — leaf
तुलसी — Ocimum tenuiflorum. प्रयोज्य अंग: पत्र.
चित्र: Pancholi / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0
आयुर्वेदीय द्रव्य

तुलसी तुलसी

Ocimum tenuiflorum · Lamiaceae

अन्य नाम: तुलसी, होली बेसिल, सुरसा

प्रयोज्य अंग: पत्र

तुलसी (Ocimum tenuiflorum) होली बेसिल है, भारतीय घरों में सर्वाधिक उगाई जाने वाली वनस्पति, जो औषधीय के साथ पवित्र भी मानी जाती है। आयुर्वेद इसे श्वसन-संक्रमण, ज्वर, कास, तनाव तथा व्याधिक्षमत्व में प्रयुक्त करता है, और यह उपमहाद्वीप के सर्वाधिक प्रयुक्त गृह-उपायों में से एक है।

तुलसी — आयुर्वेदीय गुण-कर्म
रसकटु, तिक्त
गुणलघु, रूक्ष, तीक्ष्ण
वीर्यउष्ण
विपाककटु
दोष-कर्मकफ और वात का शमन
प्रभावAdaptogen, श्वसन रसायन

सार-संक्षेप

  • वानस्पतिक नाम: Ocimum tenuiflorum
  • प्रयोज्य अंग: पत्र
  • दोष-कर्म: कफ और वात का शमन
  • सामान्य मात्रा: ताज़े पत्ते: प्रतिदिन 5–10 चबाकर, अथवा चाय/काढ़े के रूप में; शुष्क पत्र-चूर्ण 1–3 ग्राम।

तुलसी के अन्य भाषाओं में नाम

हिन्दीतुलसी
अंग्रेज़ीHoly Basil, Sacred Basil
संस्कृततुलसी, सुरसा
बंगालीতুলসী
गुजरातीતુલસી
मराठीतुळस
तमिलதுளசி
तेलुगुతులసి
कन्नड़ತುಳಸಿ
मलयालमതുളസി
लैटिन (वानस्पतिक)Ocimum tenuiflorum

परिचय

तुलसी (Ocimum tenuiflorum), अथवा होली बेसिल, आयुर्वेद की पवित्र वनस्पति है — भारतीय घरों में पूजनीय तथा अनुकूलक एवं श्वसन-बल्य के रूप में मूल्यवान। इसके सुगन्धित पत्ते व्याधिक्षमत्व को सहारा देने, श्वास-मार्गों को सुगम करने तथा तनाव के विरुद्ध मन को शान्त करने में प्रयुक्त होते हैं।

वर्गीकरण

लैमिएसी (पुदीना) कुल की तुलसी सुगन्धित, कफ-वात शामक ओषधियों में वर्णित है। इसका कटु-तिक्त रस, लघु-भेदक गुण तथा उष्ण वीर्य उसे श्वसन-तन्त्र हेतु शोधक एवं उष्ण बनाते हैं।

उपयोग एवं लाभ

तुलसी कास, प्रतिश्याय एवं ज्वर में, श्वसन-सम्बन्धी एलर्जी में, तथा व्याधिक्षमत्व हेतु दैनिक रसायन के रूप में प्रयुक्त होती है। शास्त्र इसे कफहर तथा ज्वरघ्न कहते हैं, और यह ताज़े पत्र-स्वरस, क्वाथ अथवा मधु के साथ दी जाती है। तनाव हेतु मेध्य द्रव्य के रूप में भी यह मूल्यवान है।

कास एवं प्रतिश्याय हेतु तुलसी

भारत भर का मानक गृह-उपाय — ताज़े पत्ते अथवा शुण्ठी एवं मधु सहित चाय, और एक उचित प्रथम उपाय।

ज्वर हेतु तुलसी

एक शास्त्रीय ज्वरघ्न द्रव्य, विशेषतः विषाणुजन्य तथा पुनरावर्ती ज्वरों में प्रयुक्त।

व्याधिक्षमत्व हेतु तुलसी

शीत मासों में दैनिक चाय के रूप में ली जाती है, तथा रसायन द्रव्यों में वर्गीकृत है।

तनाव हेतु तुलसी

आधुनिक शब्दों में अनुकूलक कही गई है, तथा मानसिक थकान एवं अवसन्न मनोदशा में पारम्परिक प्रयोग है।

श्वास हेतु तुलसी

अन्य श्वसन-द्रव्यों के साथ श्वास में प्रयुक्त।

गल-शोथ हेतु तुलसी

पत्ते चबाए जाते हैं, अथवा क्वाथ गण्डूष के रूप में प्रयुक्त होता है।

त्वचा-विकारों हेतु तुलसी

कवकीय संक्रमण तथा युवान-पिटिका में बाह्य रूप से लगाई जाती है, और जीर्ण त्वचा-रोग में आन्तरिक रूप से ली जाती है।

मुख-स्वास्थ्य हेतु तुलसी

अपने सूक्ष्मजीव-रोधी कर्म हेतु दन्त-चूर्णों तथा मुख-प्रक्षालन में प्रयुक्त।

रक्त-शर्करा हेतु तुलसी

प्रमेहहर द्रव्यों में नामित, जिसे कुछ प्रारम्भिक आधुनिक समर्थन भी है।

गृह-वनस्पति के रूप में तुलसी

लाखों भारतीय घरों की देहरी पर उगाई जाती है, इसीलिए यह देश की सर्वाधिक सुलभ औषधीय वनस्पति है।

मात्रा — कितना लें

ताज़े पत्ते: प्रतिदिन 5–10 चबाकर, अथवा चाय/काढ़े के रूप में; शुष्क पत्र-चूर्ण 1–3 ग्राम। कास हेतु तुलसी प्रायः मधु के साथ ली जाती है। चिकित्सकीय प्रयोग हेतु अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें।

मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।

पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर

उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।

तुलसी का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?

इस संग्रह में तुलसी के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: चरक संहिता (कास-श्वास प्रकरण); भावप्रकाश निघण्टु (पुष्पवर्ग).

चरक संहिता में तुलसी के विषय में क्या कहा गया है?

कास तथा श्वास हेतु ओषधियों में उल्लिखित। सन्दर्भ: चरक संहिता — कास-श्वास प्रकरण.

भावप्रकाश निघण्टु में तुलसी के विषय में क्या कहा गया है?

श्वसन, पाचन तथा सूक्ष्मजीव-रोधी गुणों सहित वर्णित। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — पुष्पवर्ग.

आयुर्वेद में तुलसी किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?

तुलसी कास, प्रतिश्याय एवं ज्वर में, श्वसन-सम्बन्धी एलर्जी में, तथा व्याधिक्षमत्व हेतु दैनिक रसायन के रूप में प्रयुक्त होती है। शास्त्र इसे कफहर तथा ज्वरघ्न कहते हैं, और यह ताज़े पत्र-स्वरस, क्वाथ अथवा मधु के साथ दी जाती है। तनाव हेतु मेध्य द्रव्य के रूप में भी यह मूल्यवान है।

तुलसी के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?

रस कटु, तिक्त, गुण लघु, रूक्ष, तीक्ष्ण, वीर्य उष्ण, विपाक कटु. दोष-कर्म: कफ और वात का शमन. प्रभाव: Adaptogen, श्वसन रसायन.

तुलसी को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?

द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। तुलसी का वीर्य उष्ण है और विपाक कटु — इसी से इसका कर्म बनता है: कफ और वात का शमन.

तुलसी का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?

प्रयोज्य अंग: पत्र.

तुलसी की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?

ताज़े पत्ते: प्रतिदिन 5–10 चबाकर, अथवा चाय/काढ़े के रूप में; शुष्क पत्र-चूर्ण 1–3 ग्राम। कास हेतु तुलसी प्रायः मधु के साथ ली जाती है। चिकित्सकीय प्रयोग हेतु अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।

तुलसी का प्रयोग कब वर्जित है?

आहारीय ओषधि के रूप में सामान्यतः अत्यन्त सुरक्षित। रक्त-शर्करा को मृदुता से घटा सकती है; मधुमेह हो तो मापन करते रहें। गर्भावस्था में तथा गर्भधारण का प्रयास करते समय निर्देशन में प्रयोग करें।

तुलसी कहाँ पाया जाता है?

तुलसी एक सुगन्धित क्षुप है जो भारत भर के घरों, मन्दिरों तथा वाटिकाओं में उगाई जाती है, और उष्ण, सूर्य-प्रकाशयुक्त परिस्थितियों में उष्णकटिबन्धीय एवं उप-उष्णकटिबन्धीय एशिया भर में व्यापक रूप से उगती है।

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भावप्रकाश निघण्टु — पुष्पवर्ग
    श्वसन, पाचन तथा सूक्ष्मजीव-रोधी गुणों सहित वर्णित।
  • चरक संहिता — कास-श्वास प्रकरण
    कास तथा श्वास हेतु ओषधियों में उल्लिखित।

Modern research

  1. A randomized, double-blind, placebo-controlled trial investigating the effects of an Ocimum tenuiflorum (Holy Basil) extract on stress, mood, and sleep in adults experiencing stress (see source). Frontiers in Nutrition (2022)

    An 8-week RCT (n=100) reporting reduced stress and lower salivary cortisol with a standardized Ocimum tenuiflorum extract versus placebo.

    View study doi:10.3389/fnut.2022.965130
  2. Double-blinded randomized controlled trial for immunomodulatory effects of Tulsi (Ocimum sanctum Linn.) leaf extract on healthy volunteers Mondal S, Varma S, Bamola VD, et al.. Journal of Ethnopharmacology (2011)

    A cross-over RCT reporting increased IFN-γ, IL-4 and T-helper and NK-cell percentages after Tulsi leaf extract, indicating immunomodulatory activity.

    View study doi:10.1016/j.jep.2011.05.012

सुरक्षा एवं सावधानियाँ

आहारीय ओषधि के रूप में सामान्यतः अत्यन्त सुरक्षित। रक्त-शर्करा को मृदुता से घटा सकती है; मधुमेह हो तो मापन करते रहें। गर्भावस्था में तथा गर्भधारण का प्रयास करते समय निर्देशन में प्रयोग करें।

प्राप्ति स्थान

तुलसी एक सुगन्धित क्षुप है जो भारत भर के घरों, मन्दिरों तथा वाटिकाओं में उगाई जाती है, और उष्ण, सूर्य-प्रकाशयुक्त परिस्थितियों में उष्णकटिबन्धीय एवं उप-उष्णकटिबन्धीय एशिया भर में व्यापक रूप से उगती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुलसी किसमें प्रयुक्त होती है?

कास, प्रतिश्याय, ज्वर, गल-शोथ, श्वास, तनाव तथा व्याधिक्षमत्व में। यह भारत का सर्वाधिक प्रयुक्त गृह-उपाय है, जो ताज़े पत्तों, चाय अथवा क्वाथ के रूप में ली जाती है, और रसायन द्रव्यों में वर्गीकृत है।

प्रतिदिन कितने तुलसी-पत्र लेने चाहिए?

पाँच से दस ताज़े पत्ते, चबाकर अथवा चाय के रूप में भिगोकर। चूर्ण के रूप में प्रतिदिन 1–3 ग्राम। शास्त्रीय परम्परा पत्तों को दीर्घ काल तक सीधे दाँतों पर चबाने से रोकती है, क्योंकि वे मृदु अम्लीय हैं — भिगोना इससे बचाता है।

क्या तुलसी प्रजनन-क्षमता को प्रभावित करती है?

पारम्परिक विवरणों तथा कुछ प्राणी-अध्ययनों में अधिक मात्रा का प्रलेखित प्रजनन-रोधी प्रभाव है। गर्भधारण का प्रयास कर रहे हों तो मात्रा संयत रखें। सामान्य पाक तथा चाय की मात्रा प्रायः चिन्ता का विषय नहीं।

क्या तुलसी और बेसिल एक ही हैं?

सम्बन्धित, किन्तु भिन्न। तुलसी Ocimum tenuiflorum है, अधिक कटु तथा लवंग-सदृश गन्ध वाली। स्वीट बेसिल Ocimum basilicum है, जो पाक में प्रयुक्त होती है। ये भिन्न जातियाँ हैं जिनके प्रयोग भिन्न हैं, यद्यपि दोनों Ocimum हैं।

क्या तुलसी प्रतिदिन ली जा सकती है?

हाँ — दैनिक तुलसी-चाय भारत भर की सामान्य परम्परा है और यह सतत प्रयोग हेतु अनुकूल रसायन के रूप में वर्गीकृत है। बीच-बीच में विराम लें, और गर्भधारण का प्रयास कर रहे हों तो मात्रा संयत रखें।

तुलसी किसे नहीं लेनी चाहिए?

गर्भधारण का प्रयास कर रहे हों, गर्भवती हों, रक्त पतला करने वाली औषधि लेते हों, अथवा मधुमेह हो तो चिकित्सकीय परामर्श लें — यह रक्त-शर्करा घटा सकती है। रक्त-स्कन्दन पर प्रभाव के कारण शल्य-क्रिया से लगभग दो सप्ताह पूर्व सेवन रोक दें।

किस प्रकार की तुलसी औषधीय है?

राम तुलसी (हरी) तथा कृष्ण तुलसी (बैंगनी) दोनों औषधीय रूप से प्रयुक्त होती हैं और एक ही जाति, Ocimum tenuiflorum, हैं। वन तुलसी (Ocimum gratissimum) एक सम्बन्धित वन्य जाति है जो समान रूप से प्रयुक्त होती है।

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