ब्राह्मी (Bacopa monnieri) — whole plant
ब्राह्मी — Bacopa monnieri. प्रयोज्य अंग: पञ्चाङ्ग.
चित्र: Forest and Kim Starr / Wikimedia Commons, CC BY 3.0 us
आयुर्वेदीय द्रव्य

ब्राह्मी ब्राह्मी

Bacopa monnieri · Plantaginaceae

अन्य नाम: वॉटर हिसॉप, ब्राह्मी सत्त्व

प्रयोज्य अंग: पञ्चाङ्ग

ब्राह्मी (Bacopa monnieri) आर्द्रभूमि की एक छोटी विसर्पी ओषधि है और आयुर्वेद का प्रमुखतम मेध्य रसायन — मन का द्रव्य। यह स्मृति, एकाग्रता, चिन्ता तथा बालकों की ग्रहण-शक्ति हेतु प्रयुक्त होती है, और इसका नाम ब्रह्मा से लिया गया है, उस बुद्धि के कारण जिसका यह पोषण करती कही जाती है। इसका प्रभाव सप्ताहों में संचित होकर बनता है।

ब्राह्मी — आयुर्वेदीय गुण-कर्म
रसतिक्त, कषाय
गुणलघु, सर
वीर्यशीत
विपाकमधुर
दोष-कर्मत्रिदोषहर — तीनों दोषों का शमन, विशेषतः पित्त और वात शामक
प्रभावमेध्य (बुद्धिवर्धक) रसायन

सार-संक्षेप

  • वानस्पतिक नाम: Bacopa monnieri
  • प्रयोज्य अंग: पञ्चाङ्ग
  • दोष-कर्म: त्रिदोषहर — तीनों दोषों का शमन, विशेषतः पित्त और वात शामक
  • सामान्य मात्रा: चूर्ण: प्रतिदिन 1–3 ग्राम, प्रायः उष्ण दूध या घृत के साथ; ब्राह्मी घृत तथा स्वरस भी प्रयुक्त होते हैं।

ब्राह्मी के अन्य भाषाओं में नाम

हिन्दीब्राह्मी
अंग्रेज़ीWater Hyssop, Herb of Grace
संस्कृतब्राह्मी, सरस्वती
बंगालीব্রাহ্মী
गुजरातीબ્રાહ્મી
मराठीब्राह्मी
तमिलபிரமி
तेलुगुసాంబ్రాణి ఆకు
कन्नड़ಬ್ರಾಹ್ಮಿ
मलयालमബ്രഹ്മി
लैटिन (वानस्पतिक)Bacopa monnieri

परिचय

ब्राह्मी (Bacopa monnieri) आयुर्वेद का प्रमुखतम मेध्य रसायन है — मन एवं बुद्धि को समर्पित द्रव्य। सृजनात्मक बुद्धि ब्रह्मा के नाम पर नामित यह एक छोटी विसर्पी आर्द्रभूमि-वनस्पति है, जिसका सम्पूर्ण पञ्चाङ्ग स्नायु-संस्थान के पोषण, स्मृति की तीक्ष्णता तथा मन की शान्ति हेतु प्रयुक्त होता है।

वर्गीकरण

प्लैन्टेजिनेसी (Plantaginaceae) कुल की ब्राह्मी शास्त्रों में मेध्य (बुद्धिवर्धक) द्रव्यों में वर्णित है। इसका तिक्त-कषाय रस, शीत वीर्य तथा मधुर विपाक उसे स्नायु-ऊतक (मज्जा धातु) हेतु शामक एवं कायाकल्पकारी, दोनों बनाते हैं।

उपयोग एवं लाभ

आयुर्वेद का प्रधान मेध्य रसायन, जो स्मृति, एकाग्रता एवं ग्रहण-शक्ति हेतु तथा उन मानसिक विकारों में दिया जाता है जहाँ चिन्ता एवं अस्थिरता प्रधान हों। इसे थोड़े समय नहीं, अपितु दीर्घ क्रमों में लिया जाता है, परम्परागत रूप से दूध अथवा घृत के साथ, और यह ब्राह्मी वटी तथा सिद्ध केश-तैलों में सम्मिलित है।

स्मृति हेतु ब्राह्मी

शास्त्रोक्त मेध्य द्रव्य, जो स्मरण एवं धारण को सहारा देने हेतु प्रयुक्त होता है। आधुनिक शोध का सर्वाधिक समर्थन इसी प्रयोग को प्राप्त है।

एकाग्रता हेतु ब्राह्मी

परम्परागत रूप से अध्ययन-काल में विद्यार्थियों को दी जाती है, परीक्षा से पूर्व के उपाय के रूप में नहीं अपितु सप्ताहों तक निरन्तर।

चिन्ता हेतु ब्राह्मी

शीत एवं स्थिरकारी, वहाँ प्रयुक्त जहाँ अति-सक्रिय मन एवं चिन्ता साथ आते हों — किसी शामक द्रव्य की भाँति जड़ किए बिना।

बालकों की ग्रहण-शक्ति हेतु ब्राह्मी

उन थोड़े-से स्नायु-द्रव्यों में से एक जिन्हें शास्त्रों ने बालकों के लिए उपयुक्त माना है; मधु या घृत के साथ अल्प मात्रा में दी जाती है।

निद्रा हेतु ब्राह्मी

वहाँ प्रयुक्त जहाँ निद्रा शारीरिक असुविधा से नहीं, अपितु मानसिक अस्थिरता से भंग होती हो।

रसायन के रूप में ब्राह्मी

विशेष रूप से स्नायु-संस्थान का कायाकल्पकारी, जो शास्त्रीय परम्परा में मासों तक लिया जाता है।

अपस्मार हेतु ब्राह्मी

शास्त्रों में अपस्मार हेतु नामित। केवल सहायक — अपस्मार को उचित चिकित्सकीय उपचार चाहिए और यह उसका स्थान कभी नहीं ले सकती।

केश हेतु ब्राह्मी

भृंगराज के साथ शिर-तैलों में प्रयुक्त; इसका शीत स्वभाव क्षुब्ध अथवा उष्ण शिर-त्वचा के अनुकूल बैठता है।

त्वचा हेतु ब्राह्मी

कुष्ठ में एक गौण शास्त्रीय प्रयोग, जो जीर्ण शोथयुक्त त्वचा-विकारों में आन्तरिक रूप से लिया जाता है।

ब्राह्मी वटी एवं सारस्वतारिष्ट में ब्राह्मी

शास्त्रीय मनोयोगों का प्रधान द्रव्य, जो स्मृति एवं मानसिक स्पष्टता हेतु दीर्घ क्रमों में लिया जाता है।

मात्रा — कितना लें

चूर्ण: प्रतिदिन 1–3 ग्राम, प्रायः उष्ण दूध या घृत के साथ; ब्राह्मी घृत तथा स्वरस भी प्रयुक्त होते हैं। कई सप्ताह तक नियमित सेवन से सर्वोत्तम बौद्धिक लाभ मिलता है। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें।

मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।

पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर

उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।

ब्राह्मी का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?

इस संग्रह में ब्राह्मी के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: चरक संहिता (मेध्य रसायन); भावप्रकाश निघण्टु (गुडूच्यादि वर्ग).

चरक संहिता में ब्राह्मी के विषय में क्या कहा गया है?

प्रमुखतम बुद्धिवर्धक रसायनों में नामित। सन्दर्भ: चरक संहिता — मेध्य रसायन.

भावप्रकाश निघण्टु में ब्राह्मी के विषय में क्या कहा गया है?

मेध्य एवं रसायन गुणों सहित वर्णित। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — गुडूच्यादि वर्ग.

आयुर्वेद में ब्राह्मी किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?

आयुर्वेद का प्रधान मेध्य रसायन, जो स्मृति, एकाग्रता एवं ग्रहण-शक्ति हेतु तथा उन मानसिक विकारों में दिया जाता है जहाँ चिन्ता एवं अस्थिरता प्रधान हों। इसे थोड़े समय नहीं, अपितु दीर्घ क्रमों में लिया जाता है, परम्परागत रूप से दूध अथवा घृत के साथ, और यह ब्राह्मी वटी तथा सिद्ध केश-तैलों में सम्मिलित है।

ब्राह्मी के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?

रस तिक्त, कषाय, गुण लघु, सर, वीर्य शीत, विपाक मधुर. दोष-कर्म: त्रिदोषहर — तीनों दोषों का शमन, विशेषतः पित्त और वात शामक. प्रभाव: मेध्य (बुद्धिवर्धक) रसायन.

ब्राह्मी को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?

द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। ब्राह्मी का वीर्य शीत है और विपाक मधुर — इसी से इसका कर्म बनता है: त्रिदोषहर — तीनों दोषों का शमन, विशेषतः पित्त और वात शामक.

ब्राह्मी का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?

प्रयोज्य अंग: पञ्चाङ्ग.

ब्राह्मी की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?

चूर्ण: प्रतिदिन 1–3 ग्राम, प्रायः उष्ण दूध या घृत के साथ; ब्राह्मी घृत तथा स्वरस भी प्रयुक्त होते हैं। कई सप्ताह तक नियमित सेवन से सर्वोत्तम बौद्धिक लाभ मिलता है। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।

ब्राह्मी का प्रयोग कब वर्जित है?

सामान्यतः सुसह्य। कुछ व्यक्तियों में हल्का पाचन-विकार कर सकती है; भोजन के साथ लें। गर्भावस्था में अथवा थायरॉइड या निद्राजनक औषधि के साथ निर्देशन में ही प्रयोग करें।

ब्राह्मी कहाँ पाया जाता है?

ब्राह्मी आर्द्र, दलदली भूमि की विसर्पी बहुवर्षीय ओषधि है, जो भारत तथा विश्व के उष्ण प्रदेशों की आर्द्रभूमियों, धान के खेतों की मेड़ों एवं सरिता-तटों पर उगती है।

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • चरक संहिता — मेध्य रसायन
    प्रमुखतम बुद्धिवर्धक रसायनों में नामित।
  • भावप्रकाश निघण्टु — गुडूच्यादि वर्ग
    मेध्य एवं रसायन गुणों सहित वर्णित।

Modern research

  1. Efficacy of Standardized Extract of Bacopa monnieri (Bacognize) on Cognitive Functions of Medical Students: A Six-Week, Randomized Placebo-Controlled Trial Kumar N, Abichandani LG, Thawani V, et al.. Evidence-Based Complementary and Alternative Medicine (2016)

    A 6-week RCT in medical students reporting statistically significant improvement in cognitive-function tests with standardized Bacopa monnieri extract.

    View study doi:10.1155/2016/4103423
  2. Effects of a Standardized Bacopa monnieri Extract on Cognitive Performance, Anxiety, and Depression in the Elderly: A Randomized, Double-Blind, Placebo-Controlled Trial Calabrese C, Gregory WL, Leo M, et al.. Journal of Alternative and Complementary Medicine (2008)

    A 12-week RCT in older adults reporting improved cognitive performance (delayed recall) and reduced anxiety with standardized Bacopa monnieri versus placebo.

    View study doi:10.1089/acm.2008.0018

सुरक्षा एवं सावधानियाँ

सामान्यतः सुसह्य। कुछ व्यक्तियों में हल्का पाचन-विकार कर सकती है; भोजन के साथ लें। गर्भावस्था में अथवा थायरॉइड या निद्राजनक औषधि के साथ निर्देशन में ही प्रयोग करें।

प्राप्ति स्थान

ब्राह्मी आर्द्र, दलदली भूमि की विसर्पी बहुवर्षीय ओषधि है, जो भारत तथा विश्व के उष्ण प्रदेशों की आर्द्रभूमियों, धान के खेतों की मेड़ों एवं सरिता-तटों पर उगती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्राह्मी से स्मृति सुधरने में कितना समय लगता है?

आठ से बारह सप्ताह का नियमित दैनिक सेवन। ब्राह्मी का प्रभाव संचयी है, तत्काल नहीं — शास्त्र इसे मासों तक लिया जाने वाला रसायन मानते हैं। परीक्षा से पूर्व एक मात्रा से कुछ नहीं होगा।

ब्राह्मी की मात्रा क्या है?

पञ्चाङ्ग चूर्ण प्रतिदिन 3–6 ग्राम, परम्परागत रूप से उष्ण दूध या घृत के साथ। ताज़ा स्वरस 10–20 मिली। मानकीकृत सत्त्व की मात्रा कहीं कम होती है, अतः चूर्ण के आँकड़े के स्थान पर उत्पाद के लेबल का पालन करें।

क्या ब्राह्मी और गोटु कोला एक ही हैं?

नहीं, यद्यपि इन नामों में निरन्तर भ्रम होता है। ब्राह्मी Bacopa monnieri है। गोटु कोला Centella asiatica है, जिसे संस्कृत में मण्डूकपर्णी कहते हैं। दोनों मन हेतु प्रयुक्त मेध्य द्रव्य हैं, और कुछ प्रदेशों में Centella ब्राह्मी के नाम से बिकती है — वानस्पतिक नाम अवश्य देखें।

क्या बालक ब्राह्मी ले सकते हैं?

यह उन शास्त्रीय द्रव्यों में से एक है जो परम्परागत रूप से बालकों को ग्रहण-शक्ति एवं एकाग्रता हेतु दिए जाते हैं, मधु या घृत के साथ अल्प मात्रा में। वयस्क मात्रा घटाने के स्थान पर चिकित्सक से मात्रा निर्धारित कराएँ।

क्या ब्राह्मी से तन्द्रा आती है?

सामान्यतः नहीं। यह किसी शामक द्रव्य की भाँति जड़ किए बिना अति-सक्रिय मन को स्थिर करती है, इसीलिए यह दिन में भी उपयुक्त है। कुछ व्यक्ति हल्की शान्ति अथवा मन्दता अनुभव करते हैं, विशेषतः अधिक मात्रा में।

क्या ब्राह्मी के दुष्प्रभाव हैं?

सामान्यतः सुसह्य। उत्क्लेश, मुख-शोष तथा पाचन-विकार कभी-कभी होते हैं, प्रायः खाली पेट लेने पर — इसे भोजन या दूध के साथ लें। गर्भावस्था में, थायरॉइड-विकार होने पर, अथवा निद्राजनक औषधि लेने पर चिकित्सक से परामर्श लें।

क्या ब्राह्मी चिन्ता में सहायक है?

यह परम्परागत रूप से वहाँ प्रयुक्त होती है जहाँ चिन्ता के साथ मानसिक अस्थिरता एवं क्षीण एकाग्रता हो, और आवश्यकतानुसार नहीं अपितु सप्ताहों तक ली जाती है। यह सहायक है, चिन्ता-विकार की चिकित्सा नहीं, जिसे उचित नैदानिक देखभाल चाहिए।

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