चित्र: Dr.S.Soundarapandian / Wikimedia Commons, CC0
सुगंधबाला, बाला सुगन्धबाला
Pavonia odorata · Malvaceae
अन्य नाम: ह्रीबेर, बाला, सुगन्धबाला, नेत्रबाला, हरिवेर
प्रयोज्य अंग: मूल
सुगन्धबाला (Pavonia odorata) एक सुगन्धित मूल है जो आयुर्वेद में ज्वर, दाह तथा तृष्णा हेतु शीत द्रव्य के रूप में प्रयुक्त होती है। इसके नाम का अर्थ है सुगन्धित बाला, और शास्त्रीय पित्तशामक योगों में इसका प्रयोग उशीर के समान — प्रायः परस्पर विनिमेय रूप में — होता है।
| रस | तिक्त, मधुर, कषाय |
|---|---|
| गुण | लघु, स्निग्ध |
| वीर्य | शीत |
| विपाक | कटु |
| दोष-कर्म | पित्त और कफ का शमन |
| प्रभाव | शीतल, fever, thirst |
सार-संक्षेप
- वानस्पतिक नाम: Pavonia odorata
- प्रयोज्य अंग: मूल
- दोष-कर्म: पित्त और कफ का शमन
- सामान्य मात्रा: शीतल एवं ज्वर-योगों में मूल-क्वाथ/चूर्ण।
सुगंधबाला, बाला के अन्य भाषाओं में नाम
परिचय
सुगन्धबाला (Pavonia odorata) एक सुगन्धित, शीत मूल है जो ज्वर, तृष्णा तथा दाह का शमन करती है। मधुर-तिक्त एवं शीत होकर यह पित्त को शान्त करती है और पाचन तथा मूत्र-मार्ग को सुख देती है।
वर्गीकरण
मैल्वेसी (Malvaceae) कुल की सुगन्धबाला शीत, पित्तशामक तथा ज्वरघ्न द्रव्यों में वर्गीकृत है। इसका शीत वीर्य एवं सुगन्धित स्वभाव ऊष्मा को शान्त करते हैं और शरीर-तन्त्र को स्थिर करते हैं।
उपयोग एवं लाभ
सुगन्धबाला एक शीत द्रव्य है जो दाह एवं तृष्णा सहित ज्वर में, तथा ऊष्मा सहित पाचन-विकारों में प्रयुक्त होती है। सुगन्धित एवं लघु होने से यह शास्त्रीय ज्वर-क्वाथों तथा शीतल आसवों का सामान्य घटक है, जहाँ यह पाचन को दुर्बल किए बिना पित्त को स्थिर करती है।
ज्वर हेतु सुगन्धबाला
दाह एवं अस्थिरता सहित पैत्तिक ज्वरों में प्रयुक्त एक शास्त्रीय ज्वरघ्न द्रव्य।
दाह हेतु सुगन्धबाला
शीत एवं सुगन्धित होने से वहाँ प्रयुक्त जहाँ ऊष्मा प्रधान हो।
अतितृष्णा हेतु सुगन्धबाला
तृष्णानिग्रहण द्रव्यों में नामित, जो शीत हिम के रूप में ली जाती है।
मूत्रदाह हेतु सुगन्धबाला
चन्दन, उशीर एवं गोक्षुर के साथ मूत्राशय-शोथ में प्रयुक्त।
अतिसार हेतु सुगन्धबाला
कषाय होने से पैत्तिक मूल के द्रव मल में प्रयुक्त।
रक्त-विकारों हेतु सुगन्धबाला
अपने शीत कषाय कर्म के आधार पर रक्तपित्त में प्रयुक्त।
त्वचा-विकारों हेतु सुगन्धबाला
दाहयुक्त एवं शोथयुक्त त्वचा पर बाह्य रूप से लगाई जाती है।
सुगन्ध-द्रव्य के रूप में सुगन्धबाला
इसकी सुगन्ध शीतल शर्बतों तथा पारम्परिक इत्र-निर्माण में प्रयुक्त होती है।
छर्दि हेतु सुगन्धबाला
पैत्तिक मूल की मिचली तथा वमन में प्रयुक्त।
शास्त्रीय योगों में सुगन्धबाला
उशीरासव, चन्दनासव तथा अधिकांश शास्त्रीय शीतल योगों में उपस्थित।
मात्रा — कितना लें
शीतल एवं ज्वर-योगों में मूल-क्वाथ/चूर्ण। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें।
मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।
पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर
उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।
सुगंधबाला, बाला का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?
इस संग्रह में सुगंधबाला, बाला के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: चरक संहिता (ज्वर एवं Trishna प्रकरण); भावप्रकाश निघण्टु (कर्पूरादि वर्ग).
चरक संहिता में सुगंधबाला, बाला के विषय में क्या कहा गया है?
ज्वर तथा तृष्णा हेतु शीत द्रव्यों में उल्लिखित। सन्दर्भ: चरक संहिता — ज्वर एवं Trishna प्रकरण.
भावप्रकाश निघण्टु में सुगंधबाला, बाला के विषय में क्या कहा गया है?
शीत एवं ज्वरघ्न के रूप में वर्णित। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — कर्पूरादि वर्ग.
आयुर्वेद में सुगंधबाला, बाला किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?
सुगन्धबाला एक शीत द्रव्य है जो दाह एवं तृष्णा सहित ज्वर में, तथा ऊष्मा सहित पाचन-विकारों में प्रयुक्त होती है। सुगन्धित एवं लघु होने से यह शास्त्रीय ज्वर-क्वाथों तथा शीतल आसवों का सामान्य घटक है, जहाँ यह पाचन को दुर्बल किए बिना पित्त को स्थिर करती है।
सुगंधबाला, बाला के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?
रस तिक्त, मधुर, कषाय, गुण लघु, स्निग्ध, वीर्य शीत, विपाक कटु. दोष-कर्म: पित्त और कफ का शमन. प्रभाव: शीतल, fever, thirst.
सुगंधबाला, बाला को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?
द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। सुगंधबाला, बाला का वीर्य शीत है और विपाक कटु — इसी से इसका कर्म बनता है: पित्त और कफ का शमन.
सुगंधबाला, बाला का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?
प्रयोज्य अंग: मूल.
सुगंधबाला, बाला की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?
शीतल एवं ज्वर-योगों में मूल-क्वाथ/चूर्ण। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।
सुगंधबाला, बाला का प्रयोग कब वर्जित है?
अत्यन्त सुरक्षित; एक मृदु शीत द्रव्य।
सुगंधबाला, बाला कहाँ पाया जाता है?
सुगन्धबाला भारत के मैदानी प्रदेशों की सुगन्धित ओषधि है, जिसकी सुगन्धित मूल शीतल पेयों तथा औषधि में मूल्यवान मानी जाती है।
शास्त्रीय सन्दर्भ
- भावप्रकाश निघण्टु — कर्पूरादि वर्ग
शीत एवं ज्वरघ्न के रूप में वर्णित। - चरक संहिता — ज्वर एवं Trishna प्रकरण
ज्वर तथा तृष्णा हेतु शीत द्रव्यों में उल्लिखित।
Modern research
-
Pavonia odorata: A Review
(see source). International Journal of Pharmaceutical Sciences Review and Research (2021)
A review of Pavonia odorata (Sugandhabala) documenting its traditional use for fever, inflammation, bleeding and urinary disorders and its bioactive constituents.
View study
सुरक्षा एवं सावधानियाँ
अत्यन्त सुरक्षित; एक मृदु शीत द्रव्य।
प्राप्ति स्थान
सुगन्धबाला भारत के मैदानी प्रदेशों की सुगन्धित ओषधि है, जिसकी सुगन्धित मूल शीतल पेयों तथा औषधि में मूल्यवान मानी जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सुगन्धबाला किसमें प्रयुक्त होती है?
दाह सहित ज्वर, अतितृष्णा, मूत्रदाह, अतिसार तथा पैत्तिक मूल के रक्त-विकारों में। यह एक शीत सुगन्धित मूल है जो शास्त्रीय पित्तशामक योगों में व्यापक रूप से प्रयुक्त होती है।
सुगन्धबाला की मात्रा क्या है?
मूल-चूर्ण प्रतिदिन 3–6 ग्राम, अथवा शीत हिम 40–80 मिली। इसे प्रायः अकेले लेने के स्थान पर उशीरासव जैसे किसी योग के भीतर लिया जाता है।
क्या सुगन्धबाला और उशीर एक ही हैं?
नहीं, किन्तु अनेक योगों में इनका परस्पर विनिमेय प्रयोग होता है। उशीर Chrysopogon zizanioides (खस) है; सुगन्धबाला Pavonia odorata है। दोनों शीत सुगन्धित मूल हैं जिनके संकेत परस्पर मिलते हैं, और व्यापार में प्रतिस्थापन सामान्य है।
सुगन्धबाला को हिन्दी में क्या कहते हैं?
सुगन्धबाला अथवा बाला। अंग्रेज़ी में फ़्रैग्रेंट स्वैम्प मैलो। बाला (Sida cordifolia) के साथ भ्रम पर ध्यान दें, जो पूर्णतः भिन्न द्रव्य है — वानस्पतिक नाम अवश्य देखें।
क्या सुगन्धबाला के दुष्प्रभाव हैं?
शास्त्रीय मात्रा में सुसह्य। शीत एवं कषाय होने से यह शीत कफज अवस्थाओं के लिए कम अनुकूल है। गर्भावस्था में चिकित्सक से परामर्श लें।
क्या सुगन्धबाला ग्रीष्म-पेयों में प्रयुक्त हो सकती है?
हाँ — इसकी सुगन्ध एवं शीत कर्म इसे ग्रीष्म के शर्बतों में पारम्परिक योग बनाते हैं, ठीक जैसे खस प्रयुक्त होता है। यह गृह-प्रयोग उसी गुण पर आधारित है जिस पर औषधीय प्रयोग है।
वनस्पति का कौन-सा भाग प्रयुक्त होता है?
मूल, जो शुष्क कर चूर्ण अथवा शीत हिम के रूप में प्रयुक्त होती है। शीत हिम क्वथन की अपेक्षा सुगन्धित घटकों को अधिक सुरक्षित रखता है।