चित्र: Artwork signed "H. Grisard. del." / Wikimedia Commons, Public domain
Chandan Lal (Red Sandalwood) चन्दन लाल
Pterocarpus santalinus
अन्य नाम: चन्दन लाल (रक्त चन्दन), रक्त चन्दन, चन्दन रक्त
प्रयोज्य अंग: सारकाष्ठ, Heart Wood
| रस | तिक्त (Bitter), कषाय (Astringent) |
|---|---|
| गुण | लघु (Light), रूक्ष (Dry) |
| वीर्य | उष्ण (Hot) |
| विपाक | कटु (Pungent) |
| दोष-कर्म | कफ और वात का शमन |
| प्रभाव | Classical systemic action |
सार-संक्षेप
- वानस्पतिक नाम: Pterocarpus santalinus
- प्रयोज्य अंग: सारकाष्ठ, Heart Wood
- दोष-कर्म: कफ और वात का शमन
- सामान्य मात्रा: सारकाष्ठ चूर्ण प्रतिदिन 3–6 ग्राम; क्वाथ रूप में 50–100 मिली।
Chandan Lal (Red Sandalwood) के अन्य भाषाओं में नाम
परिचय
चन्दन लाल ही रक्त चन्दन (Pterocarpus santalinus) है, दक्षिणी पूर्वी घाट का रेड सैंडर्स। श्वेत चन्दन के विपरीत इसमें प्रायः कोई गन्ध नहीं होती; इसका गुण उसका गहरा लाल, शीत सारकाष्ठ है।
आयुर्वेद इसका प्रयोग वहाँ करता है जहाँ रक्त से उष्णता निकालनी हो — दाह, रक्तस्राव, छर्दि तथा उष्ण त्वचा-विकारों में — और वर्ण्य द्रव्य के रूप में कान्ति-लेपों में।
वर्गीकरण
कुल फैबेसी (Fabaceae)। सारकाष्ठ औषधीय अंग है। रस: मधुर, तिक्त, कषाय। गुण: गुरु, रूक्ष। वीर्य: शीत। विपाक: कटु। दोषघ्नता: पित्त एवं कफ का शमन।
उपयोग एवं लाभ
रक्तपित्त (रक्तस्राव-विकार), दाह, छर्दि तथा उष्ण शोथयुक्त त्वचा-रोग में दिया जाता है। दाह, युवान-पिटिका एवं वर्ण-दोष हेतु बाह्य रूप से कल्क रूप में लगाया जाता है। यह चन्दनासव तथा उशीरासव का, एवं इस संग्रह के कान्ति-तैलों का घटक है।
रक्तस्राव एवं दाह हेतु रक्त चन्दन
इसका शीत, कषाय काष्ठ रक्तपित्त — ऊर्ध्व अथवा अधो मार्ग से रक्तस्राव — में तथा पित्त-वृद्धि के साथ आने वाले दाह में शास्त्रोक्त चयन है।
कान्ति हेतु रक्त चन्दन
जल अथवा गुलाब-जल के साथ घिसकर कल्क रूप में यह युवान-पिटिका, वर्ण-दोष तथा उष्ण, क्षुब्ध त्वचा हेतु पारम्परिक प्रयोग है।
मात्रा — कितना लें
सारकाष्ठ चूर्ण प्रतिदिन 3–6 ग्राम; क्वाथ रूप में 50–100 मिली। बाह्य रूप से कल्क के रूप में लगाकर सूखने दिया जाता है।
मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।
पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर
उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।
Chandan Lal (Red Sandalwood) का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?
इस संग्रह में Chandan Lal (Red Sandalwood) के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: सुश्रुत संहिता (सूत्रस्थान — Sarivadi Gana); भावप्रकाश निघण्टु (कर्पूरादि वर्ग — रक्त Chandana).
सुश्रुत संहिता में Chandan Lal (Red Sandalwood) के विषय में क्या कहा गया है?
शीत, रक्त-प्रसादक द्रव्यों के साथ वर्गीकृत। सन्दर्भ: सुश्रुत संहिता — सूत्रस्थान — Sarivadi Gana.
भावप्रकाश निघण्टु में Chandan Lal (Red Sandalwood) के विषय में क्या कहा गया है?
शीत वीर्य; दाह, रक्तपित्त एवं छर्दि में निर्दिष्ट। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — कर्पूरादि वर्ग — रक्त Chandana.
आयुर्वेद में Chandan Lal (Red Sandalwood) किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?
रक्तपित्त (रक्तस्राव-विकार), दाह, छर्दि तथा उष्ण शोथयुक्त त्वचा-रोग में दिया जाता है। दाह, युवान-पिटिका एवं वर्ण-दोष हेतु बाह्य रूप से कल्क रूप में लगाया जाता है। यह चन्दनासव तथा उशीरासव का, एवं इस संग्रह के कान्ति-तैलों का घटक है।
Chandan Lal (Red Sandalwood) के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?
रस तिक्त (Bitter), कषाय (Astringent), गुण लघु (Light), रूक्ष (Dry), वीर्य उष्ण (Hot), विपाक कटु (Pungent). दोष-कर्म: कफ और वात का शमन. प्रभाव: Classical systemic action.
Chandan Lal (Red Sandalwood) को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?
द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। Chandan Lal (Red Sandalwood) का वीर्य उष्ण (Hot) है और विपाक कटु (Pungent) — इसी से इसका कर्म बनता है: कफ और वात का शमन.
Chandan Lal (Red Sandalwood) का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?
प्रयोज्य अंग: सारकाष्ठ, Heart Wood.
Chandan Lal (Red Sandalwood) की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?
सारकाष्ठ चूर्ण प्रतिदिन 3–6 ग्राम; क्वाथ रूप में 50–100 मिली। बाह्य रूप से कल्क के रूप में लगाकर सूखने दिया जाता है। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।
Chandan Lal (Red Sandalwood) का प्रयोग कब वर्जित है?
शास्त्रीय प्रयोग में सुरक्षित। रेड सैंडर्स भारत में CITES-सूचीबद्ध, संरक्षित जाति है — केवल उन्हीं आपूर्तिकर्ताओं से लें जिनके पास प्रलेखित विधिसम्मत स्रोत हो। रँगे काष्ठ से अपमिश्रण सामान्य है; असली सारकाष्ठ स्थायी लाल रंग देता है, ऐसा नहीं जो धुल जाए।
Chandan Lal (Red Sandalwood) कहाँ पाया जाता है?
आन्ध्र प्रदेश के दक्षिणी पूर्वी घाट के एक छोटे क्षेत्र में स्थानिक, जो शुष्क पथरीली पहाड़ियों पर उगता है। वन्य संग्रह कठोरता से विनियमित है।
शास्त्रीय सन्दर्भ
- भावप्रकाश निघण्टु — कर्पूरादि वर्ग — रक्त Chandana
शीत वीर्य; दाह, रक्तपित्त एवं छर्दि में निर्दिष्ट। - सुश्रुत संहिता — सूत्रस्थान — Sarivadi Gana
शीत, रक्त-प्रसादक द्रव्यों के साथ वर्गीकृत।
सुरक्षा एवं सावधानियाँ
शास्त्रीय प्रयोग में सुरक्षित। रेड सैंडर्स भारत में CITES-सूचीबद्ध, संरक्षित जाति है — केवल उन्हीं आपूर्तिकर्ताओं से लें जिनके पास प्रलेखित विधिसम्मत स्रोत हो। रँगे काष्ठ से अपमिश्रण सामान्य है; असली सारकाष्ठ स्थायी लाल रंग देता है, ऐसा नहीं जो धुल जाए।
प्राप्ति स्थान
आन्ध्र प्रदेश के दक्षिणी पूर्वी घाट के एक छोटे क्षेत्र में स्थानिक, जो शुष्क पथरीली पहाड़ियों पर उगता है। वन्य संग्रह कठोरता से विनियमित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या रक्त चन्दन और श्वेत चन्दन एक ही हैं?
नहीं। श्वेत चन्दन (चन्दन, Santalum album) सुगन्धित है और उसके तैल हेतु प्रयुक्त होता है; रक्त चन्दन (Pterocarpus santalinus) प्रायः गन्धहीन है और अपने शीत सारकाष्ठ तथा वर्ण हेतु प्रयुक्त होता है।
क्या इसे मुख पर लगाया जा सकता है?
हाँ — चूर्ण का कल्क उष्णताजन्य त्वचा-विकारों हेतु पारम्परिक प्रयोग है। पहले पैच परीक्षण करें, और टूटी त्वचा पर न लगाएँ।