बच, घोड़बच (Acorus calamus) — rhizome
बच, घोड़बच — Acorus calamus. प्रयोज्य अंग: प्रकन्द.
चित्र: Berkshire Community College Bioscience Image Library / Wikimedia Commons, CC0
आयुर्वेदीय द्रव्य

बच, घोड़बच वचा

Acorus calamus · Acoraceae

अन्य नाम: वच, बच, स्वीट फ़्लैग, गोरबच

प्रयोज्य अंग: प्रकन्द

वचा (Acorus calamus) बच है, कर्दम-भूमि का एक प्रकन्द जिसके नाम का अर्थ ही "वाणी" है। आयुर्वेद इसे वाक्-विकारों, स्मृति, अपस्मार तथा मन हेतु मेध्य द्रव्य के रूप में प्रयुक्त करता है। इसमें बीटा-असारोन होता है, इसीलिए अनेक देशों में इसका प्रयोग प्रतिबन्धित है और शोधन महत्त्वपूर्ण है।

बच, घोड़बच — आयुर्वेदीय गुण-कर्म
रसकटु, तिक्त
गुणलघु, तीक्ष्ण
वीर्यउष्ण
विपाककटु
दोष-कर्मकफ और वात का शमन
प्रभावमेध्य (intellect), speech बल्य

सार-संक्षेप

  • वानस्पतिक नाम: Acorus calamus
  • प्रयोज्य अंग: प्रकन्द
  • दोष-कर्म: कफ और वात का शमन
  • सामान्य मात्रा: शोधित चूर्ण 125–500 मिग्रा, प्रायः मधु के साथ; मेध्य योगों के भीतर अल्प मात्रा में प्रयुक्त।

बच, घोड़बच के अन्य भाषाओं में नाम

हिन्दीबच, घोड़बच
अंग्रेज़ीSweet Flag, Calamus
संस्कृतवचा, षड्ग्रन्था
बंगालीবচ
गुजरातीગંધીલો વજ
मराठीवेखंड
तमिलவசம்பு
तेलुगुవస
कन्नड़ಬಜೆ
मलयालमവയമ്പ്
लैटिन (वानस्पतिक)Acorus calamus

परिचय

वचा (Acorus calamus), अथवा बच, वाणी, बुद्धि तथा स्नायु-तन्त्र हेतु एक शास्त्रीय मेध्य ओषधि है। इसका सुगन्धित प्रकन्द मन के स्रोतों को स्वच्छ करता है और पारम्परिक रूप से स्वर एवं स्पष्टता सुधारने में प्रयुक्त होता है।

वर्गीकरण

एकोरेसी (Acoraceae) कुल की वचा मेध्य (बुद्धिवर्धक) तथा कफ-वात शामक द्रव्यों में वर्गीकृत है। इसका कटु-तिक्त रस, तीक्ष्ण गुण तथा उष्ण वीर्य शिर से कफ का हरण करते हैं और मन को उद्दीप्त करते हैं।

उपयोग एवं लाभ

वचा वाणी तथा बुद्धि हेतु शास्त्रीय मेध्य द्रव्य है, जो विलम्बित वाणी, हकलाहट तथा क्षीण स्मृति में, और मान्द्य सहित मानस-विकारों में दी जाती है। यह अवरुद्ध उर में तथा नस्य-प्रयोग के रूप में भी प्रयुक्त होती है। मात्रा अल्प है — यह प्रबल द्रव्य है।

वाणी हेतु वचा

इसके नाम का अर्थ ही वाणी है, और यह बालकों की विलम्बित वाणी तथा हकलाहट का शास्त्रीय द्रव्य है।

स्मृति हेतु वचा

एकाग्रता एवं स्मरण हेतु प्रयुक्त एक मेध्य द्रव्य, प्रायः ब्राह्मी के साथ।

अपस्मार हेतु वचा

शास्त्रों में अपस्मार में नामित। कठोर रूप से केवल सहायक — अपस्मार को उचित चिकित्सकीय उपचार चाहिए।

नस्य द्रव्य के रूप में वचा

जत्रु के ऊर्ध्व भाग के विकारों हेतु नस्य-कल्पों में प्रयुक्त, जहाँ इसकी तीक्ष्णता शिर को स्वच्छ करती है।

पाचन हेतु वचा

आध्मान तथा अरुचि में प्रयुक्त एक दीपन द्रव्य।

कास हेतु वचा

अवरोध सहित कफज कास में मधु के साथ प्रयुक्त।

बाल-योगों में वचा

वाणी तथा बौद्धिक विकास हेतु पारम्परिक रूप से बालकों को अत्यल्प मात्रा में दी जाती है।

वामक के रूप में वचा

शास्त्रीय वमन-चिकित्सा में अधिक मात्रा में, निगरानी के अन्तर्गत प्रयुक्त।

सन्धि-शूल हेतु वचा

शूलयुक्त सन्धियों पर लेप के रूप में बाह्य लगाई जाती है।

शास्त्रीय योगों में वचा

सारस्वतारिष्ट, ब्राह्मी वटी तथा अधिकांश शास्त्रीय मेध्य योगों में उपस्थित।

मात्रा — कितना लें

शोधित चूर्ण 125–500 मिग्रा, प्रायः मधु के साथ; मेध्य योगों के भीतर अल्प मात्रा में प्रयुक्त। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें।

मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।

पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर

उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।

बच, घोड़बच का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?

इस संग्रह में बच, घोड़बच के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: चरक संहिता (मेध्य एवं Sanjnasthapana); भावप्रकाश निघण्टु (हरीतक्यादि वर्ग).

चरक संहिता में बच, घोड़बच के विषय में क्या कहा गया है?

मन तथा वाणी को सहारा देने वाली ओषधियों में उल्लिखित। सन्दर्भ: चरक संहिता — मेध्य एवं Sanjnasthapana.

भावप्रकाश निघण्टु में बच, घोड़बच के विषय में क्या कहा गया है?

मेध्य गुणों सहित वर्णित। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — हरीतक्यादि वर्ग.

आयुर्वेद में बच, घोड़बच किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?

वचा वाणी तथा बुद्धि हेतु शास्त्रीय मेध्य द्रव्य है, जो विलम्बित वाणी, हकलाहट तथा क्षीण स्मृति में, और मान्द्य सहित मानस-विकारों में दी जाती है। यह अवरुद्ध उर में तथा नस्य-प्रयोग के रूप में भी प्रयुक्त होती है। मात्रा अल्प है — यह प्रबल द्रव्य है।

बच, घोड़बच के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?

रस कटु, तिक्त, गुण लघु, तीक्ष्ण, वीर्य उष्ण, विपाक कटु. दोष-कर्म: कफ और वात का शमन. प्रभाव: मेध्य (intellect), speech बल्य.

बच, घोड़बच को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?

द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। बच, घोड़बच का वीर्य उष्ण है और विपाक कटु — इसी से इसका कर्म बनता है: कफ और वात का शमन.

बच, घोड़बच का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?

प्रयोज्य अंग: प्रकन्द.

बच, घोड़बच की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?

शोधित चूर्ण 125–500 मिग्रा, प्रायः मधु के साथ; मेध्य योगों के भीतर अल्प मात्रा में प्रयुक्त। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।

बच, घोड़बच का प्रयोग कब वर्जित है?

प्रबल; अल्प शोधित मात्रा में प्रयोग करें। अधिक मात्रा वर्जित तथा गर्भावस्था में केवल निर्देशन में प्रयोग करें।

बच, घोड़बच कहाँ पाया जाता है?

वचा एक अर्ध-जलीय कर्दम-वनस्पति है जो भारत तथा शीतोष्ण एशिया भर में तालाबों, नालों एवं आर्द्रभूमियों के किनारों पर उगती है।

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • चरक संहिता — मेध्य एवं Sanjnasthapana
    मन तथा वाणी को सहारा देने वाली ओषधियों में उल्लिखित।
  • भावप्रकाश निघण्टु — हरीतक्यादि वर्ग
    मेध्य गुणों सहित वर्णित।

Modern research

  1. Role of Vacha (Acorus calamus Linn.) in Neurological and Metabolic Disorders: Evidence from Ethnopharmacology, Phytochemistry, Pharmacology and Clinical Study Sharma V, et al.. Journal of Clinical Medicine (2020)

    A review of Vacha (Acorus calamus) covering its neuroprotective, anticonvulsant and cognitive-supportive pharmacology and clinical use.

    View study doi:10.3390/jcm9041176

सुरक्षा एवं सावधानियाँ

प्रबल; अल्प शोधित मात्रा में प्रयोग करें। अधिक मात्रा वर्जित तथा गर्भावस्था में केवल निर्देशन में प्रयोग करें।

प्राप्ति स्थान

वचा एक अर्ध-जलीय कर्दम-वनस्पति है जो भारत तथा शीतोष्ण एशिया भर में तालाबों, नालों एवं आर्द्रभूमियों के किनारों पर उगती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वचा किसमें प्रयुक्त होती है?

वाक्-विकारों तथा बालकों की विलम्बित वाणी, स्मृति एवं एकाग्रता, सहायक रूप में अपस्मार, तथा पाचन में। इसके नाम का अर्थ ही वाणी है, जो उसका प्रधान शास्त्रीय संकेत अंकित करता है।

क्या वचा सुरक्षित है?

इसमें सावधानी अपेक्षित है। Acorus calamus में बीटा-असारोन होता है, जो प्राणी-अध्ययनों में कर्कट-जनक है, और आहार-योजक के रूप में उसका प्रयोग यूरोपीय संघ तथा अमेरिका में प्रतिबन्धित है। शास्त्रीय परम्परा शोधन अपेक्षित करती है और योगों के भीतर अल्प मात्रा प्रयुक्त करती है। इससे स्वयं-चिकित्सा न करें।

वचा की मात्रा क्या है?

शोधित प्रकन्द-चूर्ण प्रतिदिन 125–500 मिग्रा — जानबूझकर अल्प मात्रा। अधिक मात्रा वामक होती है, जो निगरानी में दिया जाने वाला पृथक् शास्त्रीय प्रयोग है।

क्या वचा बालकों को दी जा सकती है?

वाणी तथा बौद्धिक विकास हेतु यह पारम्परिक रूप से अत्यल्प मात्रा में दी जाती है, किन्तु बीटा-असारोन की उपस्थिति को देखते हुए यह केवल चिकित्सक के निर्देश पर हो, किसी सामान्य संस्तुति से नहीं।

वचा को हिन्दी में क्या कहते हैं?

बच अथवा गोरबच। अंग्रेज़ी में स्वीट फ़्लैग अथवा कैलमस। भारतीय भेद, Acorus calamus var. calamus, असारोन-मात्रा में उत्तर अमेरिकी भेद से भिन्न है।

वचा किसे नहीं लेनी चाहिए?

गर्भावस्था एवं स्तनपान में, तथा चिकित्सक की निगरानी के बिना अपस्मार में वर्जित। इसे दीर्घकाल तक न लें। बीटा-असारोन की उपस्थिति को देखते हुए यकृत-रोग वाले किसी भी व्यक्ति को इससे बचना चाहिए।

क्या वचा स्मृति में सहायक है?

यह स्मृति एवं एकाग्रता हेतु प्रयुक्त शास्त्रीय मेध्य द्रव्य है, प्रायः ब्राह्मी के साथ। ब्राह्मी के आधुनिक प्रमाण बेहतर हैं और सुरक्षा-चित्र कहीं अधिक अच्छा है, अतः केवल स्मृति हेतु सामान्यतः वही श्रेष्ठ प्रथम चयन है।

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