Karanj Oil
करञ्ज तैल (Karañja Taila)
अन्य नाम: Karanja Taila, Karanj Tel, Karanja Oil, Pongamia Oil
करंज तेल एक आयुर्वेदिक करंज (Pongamia pinnata) तेल है, जिसका आयुर्वेद में परंपरागत उपयोग त्वचा पर कुष्ठ (पुरानी, मोटी, पपड़ीदार त्वचा समस्याएँ), कंडू (खुजली) और कृमि (परजीवी और फफूँद जैसी त्वचा समस्याएँ) में होता है। इसमें पौधों के तेज़ दूधिया रस हैं और यह केवल बाहरी उपयोग के लिए है।
सावधानी: चिकित्सकीय देखरेख में ही लें इस दवा के लेबल पर यह चेतावनी छपी है। इसे केवल योग्य चिकित्सक की सलाह पर लें और बताई गई मात्रा से अधिक न लें।
- मुफ़्त डिलीवरी, ऑर्डर ₹699 से ऊपर
- कैश ऑन डिलीवरी उपलब्ध
- 24–48 घंटे में भेजा जाता है
कैसे लें: केवल बाहरी उपयोग: छोटी जगह पर जाँचने के बाद, 1–2 ml की पतली परत केवल प्रभावित धब्बे पर दिन में एक या दो बार लगाएँ, या योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक के निर्देशानुसार। उपयोग के बाद हाथ अच्छी तरह धोएँ।
- आयुर्वेद में परंपरागत रूप से कुष्ठ (पुरानी, मोटी, पपड़ीदार त्वचा समस्याएँ) के लिए
- परंपरागत रूप से कंडूघ्न (कंडू, यानी खुजली में राहत) बताया गया है — चरक संहिता में करंज
- परंपरागत रूप से कृमिघ्न (परजीवी और फफूँद जैसी त्वचा समस्याओं में परंपरागत उपयोग) बताया गया है
- परंपरागत रूप से तीक्ष्ण (तेज़, गहरी पैठ वाली) औषधियाँ, जिनका उपयोग कड़े, मोटे धब्बे साफ़ करने में होता है
- परंपरागत रूप से त्वक (त्वचा) में कफ और वात संतुलित करता है
परंपरागत रूप से इनके लिए: Skin Wellness
Karanj Oil के बारे में
करंज (Pongamia pinnata) आयुर्वेद की शास्त्रीय त्वचा औषधियों में से एक है, जिसे चरक और सुश्रुत संहिता कुष्ठघ्न (त्वचा विकारों में राहत देने वाली), कंडूघ्न (खुजली में राहत देने वाली) और कृमिघ्न (परजीवी-रोधी) बताती हैं। करंज तेल शास्त्रीय कुष्ठ चिकित्सा की परंपरा में इसे एक तेज़ त्वचा तेल के आधार के रूप में प्रयोग करता है। इसमें क्या है: करंज बीज, सप्तपर्णी, कलिहारी (Gloriosa superba), स्नुही (Euphorbia) और अर्क (Calotropis) के दूधिया रस, चित्रक, भृंगराज और हल्दी, जिन्हें तिल के तेल में गोमूत्र के साथ पकाया जाता है। इनमें से कई, ख़ासकर कलिहारी और दोनों दूधिया रस, शक्तिशाली और जलन पैदा करने वाले हैं; आयुर्वेद में इनका बाहरी प्रयोग मोटी, कड़ी, खुजली वाली त्वचा को तोड़ने के लिए होता है। नीचे की तालिका में हर घटक और उसका भाग दिया गया है। आयुर्वेद इसे कैसे समझता है: मोटे, पपड़ीदार, खुजली वाले धब्बों वाले पुराने कुष्ठ को त्वचा में बैठे कफ और वात के रूप में बताया गया है। ऐसी तीक्ष्ण (तेज़, गहरी पैठ वाली) औषधियाँ उन्हें खुरचने और साफ़ करने में प्रयोग होती हैं, इसीलिए यह तेल त्वचा को आराम देने वाले तेल से तेज़ है और इसे सावधानी से प्रयोग करना चाहिए। कैसे लगाएँ: पहले छोटी जगह पर लगाकर जाँचें। केवल प्रभावित धब्बे पर पतली परत लगाएँ, स्वस्थ या कटी-फटी त्वचा पर नहीं, दिन में एक या दो बार, और बाद में हाथ अच्छी तरह धोएँ। आँख, मुँह और गुप्तांगों से दूर रखें। परंपरा और प्रमाण: ये उपयोग पारंपरिक हैं; तेल का क्लिनिकल परीक्षण नहीं हुआ है। सोरायसिस, एक्ज़िमा, फफूँद संक्रमण और दूसरी पुरानी त्वचा समस्याओं के लिए त्वचा रोग विशेषज्ञ से निदान ज़रूरी है — डॉक्टर को दिखाएँ। त्वचा लाल, छिली या छालेदार हो जाए तो बंद कर दें।
शास्त्रीय संदर्भ: Bhaishajya Ratnavali (as printed on the pack label).
Karanj Oil के घटक
| संस्कृत | नाम | वानस्पतिक नाम | प्रयुक्त भाग | अनुपात | मुख्य कर्म |
|---|---|---|---|---|---|
| करंज | Karanj | Pongamia glabra | Sd. | Q.S. | Kandughna, Vranaropana |
| सप्तपर्णी | Saptaparni | Alstonia scholaris | Rt. | Q.S. | Tridoshahara, Deepana, Pachana |
| कलिहारी (लाङ्गली) | Kalihari | Gloriosa superba | Rz. | Q.S. | |
| थूहर, सेहुंड | Sehund Ka Dudh | Euphorbia neriifolia | Latex | Q.S. | Teevrani Virechana, Kaphahara |
| आक का दुग्ध | Aak Ka Milk | Calotropis gigantea | Latex | Q.S. | Jeevaniya, Brimhania, Vrishya |
| चित्रक | Chitrak | Plumbago zeylanica | Rt. | Q.S. | Deepaaniya, Shoolahara, Arshoghna |
| भृंगराज, भांगरा | Bhangra | Eclipta alba | Lf. | Q.S. | Keshya, Yakrit-uttejaka, Rasayana |
| हल्दी | Haldi | Curcuma longa | Rz. | Q.S. | Kushtaghna, Pramehahara, Varnya |
| गोमूत्र | Gau Mutra | Cow urine (Bos taurus) | Processing medium | Q.S. | Kaphaghna, Lekhana, Vishaghna |
| तिल | Til Tel | Sesamum indicum | Seed oil | 10 ml | Vatahara, Tvachya, Snehana |
Karanj Oil की मात्रा और सेवन विधि
केवल बाहरी उपयोग: छोटी जगह पर जाँचने के बाद, 1–2 ml की पतली परत केवल प्रभावित धब्बे पर दिन में एक या दो बार लगाएँ, या योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक के निर्देशानुसार। उपयोग के बाद हाथ अच्छी तरह धोएँ।
सावधानियाँ और किन्हें नहीं लेना चाहिए
केवल बाहरी उपयोग के लिए। निगलने पर ज़हरीला: इसमें कलिहारी (Gloriosa superba) और स्नुही व अर्क का दूधिया रस है। बच्चों की पहुँच से दूर रखें। लेबल सावधानी: चिकित्सकीय देखरेख में प्रयोग करें। पहले जाँचें; लाली, जलन या छाले हो सकते हैं। आँख, मुँह, गुप्तांगों के पास, कटी-फटी या छिली त्वचा पर, चेहरे पर, बच्चों पर, या गर्भावस्था या स्तनपान में कभी न लगाएँ। उपयोग के बाद हाथ धोएँ। त्वचा लाल, छिली या छालेदार हो तो बंद करें और सलाह लें।
स्रोत और संदर्भ
- पैक लेबल
- लेबल पर छपा संदर्भ: (B.R.) = Bhaishajya Ratnavali. स्रोत: प्राच्यम पैक लेबल।
- शास्त्रीय ग्रंथ
- Bhaishajya Ratnavali. Kushtha / Visarpa chikitsa; chapter number NOT VERIFIED against the printed text.
- निर्माण विधि
- Taila-paka: sesame oil cooked with the herbal paste and liquids on low heat until the water has evaporated, then filtered. Label lists the herbs as Q.S. in Til Tel; proportions not printed.
- अनुपान
- Not applicable: external use only.
- शोध
- इस योग का कोई प्रकाशित क्लिनिकल परीक्षण नहीं मिला (PubMed खोज, नवंबर 2026)।
Karanj Oil — सामान्य प्रश्न
करंज तेल किस काम आता है?
आयुर्वेद में करंज तेल का परंपरागत उपयोग त्वचा पर कुष्ठ (पुरानी, मोटी, पपड़ीदार त्वचा समस्याएँ), कंडू (खुजली) और कृमि (परजीवी और फफूँद जैसी त्वचा समस्याएँ) में होता है। चरक संहिता में करंज शास्त्रीय कुष्ठघ्न और कंडूघ्न औषधि है। क्योंकि इसमें तेज़, जलन पैदा करने वाली औषधियाँ हैं, इसे केवल प्रभावित धब्बे पर, बाहर से लगाया जाता है।
करंज तेल कैसे लगाएँ?
पहले जाँच करें: छोटी जगह पर एक बूँद लगाकर 24 घंटे रुकें। कोई प्रतिक्रिया न हो, तो 1–2 ml की पतली परत केवल प्रभावित धब्बे पर दिन में एक या दो बार लगाएँ। इसे स्वस्थ या कटी-फटी त्वचा पर न मलें। बाद में हाथ अच्छी तरह धोएँ और आँखों से दूर रखें।
क्या करंज तेल सोरायसिस या एक्ज़िमा में अच्छा है?
शास्त्र करंज-आधारित तेलों का प्रयोग कुष्ठ में करते हैं, एक ऐसी श्रेणी जिसमें सोरायसिस और पुराने एक्ज़िमा जैसी मोटी, पपड़ीदार और खुजली वाली स्थितियाँ आती हैं। वैद्य कभी-कभी इसे लंबी त्वचा योजना में शामिल करते हैं। इन स्थितियों में त्वचा रोग विशेषज्ञ का निदान ज़रूरी है, और छिले, रिसते या सूजे एक्ज़िमा के लिए यह तेल बहुत तेज़ है। इसे केवल चिकित्सक की सलाह पर प्रयोग करें।
क्या करंज तेल फफूँद संक्रमण या दाद में लगाया जा सकता है?
करंज और दूसरी औषधियों का परंपरागत उपयोग फफूँद जैसे धब्बों में कृमिघ्न के रूप में होता है, और प्रयोगशाला अध्ययनों में करंज ने फफूँद-रोधी असर दिखाया है। जो दाद फैले, सिर, नाखून या जांघों के बीच हो, या बार-बार लौटे, उसके लिए डॉक्टर से इलाज कराएँ। इस तेल को जांघों के बीच या कटी-फटी त्वचा पर न लगाएँ।
क्या करंज तेल सुरक्षित है?
छोटी जगह पर जाँच के बाद, प्रभावित छोटे हिस्से पर बाहर से लगाने पर इसका प्रयोग व्यवहार में होता है। पर इसमें कलिहारी और स्नुही व अर्क के दूधिया रस हैं, जो त्वचा पर जलन करते हैं और निगलने पर ज़हरीले हैं, इसलिए इसके लेबल पर चिकित्सकीय देखरेख में प्रयोग की सावधानी छपी है। इसे बच्चों से दूर रखें।
करंज तेल से त्वचा या आँख में जलन हो तो क्या करें?
त्वचा को ख़ूब साबुन और पानी से धोएँ और तेल का प्रयोग बंद करें। आँख में चला जाए तो 15 मिनट तक साफ़ बहते पानी से धोएँ और डॉक्टर को दिखाएँ। अगर कोई बच्चा इसे निगल ले, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा लें और शीशी साथ ले जाएँ।
क्या करंज तेल एक शास्त्रीय योग है?
चरक और सुश्रुत संहिता करंज को शास्त्रीय त्वचा औषधि बताती हैं, और करंज-आधारित तेल शास्त्रीय कुष्ठ चिकित्सा में मिलते हैं। प्राच्यम के पैक के लेबल पर करंज तेल का संदर्भ ग्रंथ भैषज्य रत्नावली छपा है।
यह एक पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधि है। यहाँ दी गई जानकारी शास्त्रीय उपयोग बताती है और चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। यह किसी रोग के निदान या रोकथाम के लिए नहीं है। उपयोग से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श करें, विशेषकर गर्भावस्था, स्तनपान में या कोई दवा चल रही हो तो।
साथ में ली जाने वाली औषधियाँ
परंपरागत रूप से इसके साथ ली जाने वाली औषधियाँ।
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