द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश (Vitis vinifera) — fruit
द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश — Vitis vinifera. प्रयोज्य अंग: फल.
चित्र: Ernest Niedermann - VIEX / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0 at
आयुर्वेदीय द्रव्य

द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश द्राक्षा

Vitis vinifera · Vitaceae

अन्य नाम: मृद्वीका, मुनक्का, किशमिश, सूखे अंगूर

प्रयोज्य अंग: फल

द्राक्षा (Vitis vinifera) अंगूर है, और सुखाकर मुनक्का के रूप में यह आयुर्वेद के मृदुतम पोषक द्रव्यों में से एक है। मधुर एवं शीत होकर यह शुष्क कास, तृष्णा, दाह, विबन्ध तथा रोगोत्तर पुनर्लाभ में प्रयुक्त होती है, और बालकों, वृद्धों तथा गर्भावस्था में भी पर्याप्त सुरक्षित है।

द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश — आयुर्वेदीय गुण-कर्म
रसमधुर
गुणगुरु, स्निग्ध
वीर्यशीत
विपाकमधुर
दोष-कर्मवात और पित्त का शमन
प्रभावबृंहण (पोषक), रसायन

सार-संक्षेप

  • वानस्पतिक नाम: Vitis vinifera
  • प्रयोज्य अंग: फल
  • दोष-कर्म: वात और पित्त का शमन
  • सामान्य मात्रा: ताज़ा फल, मुनक्का, अथवा द्राक्षासव; भिगोई हुई मुनक्का शास्त्रोक्त मृदु बल्य है।

द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश के अन्य भाषाओं में नाम

हिन्दीद्राक्षा, मुनक्का/किशमिश
अंग्रेज़ीGrapes, Raisins
संस्कृतद्राक्षा, मृद्वीका
बंगालीআঙুর / কিসমিস
गुजरातीદ્રાક્ષ
मराठीद्राक्ष / मनुका
तमिलதிராட்சை
तेलुगुద్రాక్ష
कन्नड़ದ್ರಾಕ್ಷಿ
लैटिन (वानस्पतिक)Vitis vinifera

परिचय

द्राक्षा (अंगूर/मुनक्का, Vitis vinifera) एक मधुर, शीत एवं पोषक फल है जो बल पुनः स्थापित करने, तृष्णा शान्त करने तथा श्वसन एवं पाचन-मार्ग को शान्ति देने हेतु प्रयुक्त होता है। मृद्वीका (मुनक्का) के रूप में सुखाकर यह एक मृदु रसायन है।

वर्गीकरण

विटेसी (Vitaceae) कुल की द्राक्षा बृंहण (पोषक), रसायन तथा शीत द्रव्यों में वर्गीकृत है। इसका मधुर रस, गुरु-स्निग्ध गुण एवं शीत वीर्य पोषण करते हैं और वात-पित्त का शमन करते हैं।

उपयोग एवं लाभ

मुनक्का बल्य द्रव्यों में मृदुतम है, जिसे जीवनीय एवं बृंहणीय कहा गया है। यह तृष्णा, दाह, शुष्क कास तथा स्वरभेद में, और ज्वर के पश्चात् आने वाली दुर्बलता में वहाँ प्रयुक्त होती है जहाँ कोई भारी बल्य सह्य न हो। यह मृदु विरेचक भी है और अनेक अरिष्टों का मधुर आधार बनती है।

शुष्क कास हेतु द्राक्षा

मधुर एवं स्निग्ध होने से यह शुष्क, क्षुब्ध कण्ठ को शान्ति देती है, जहाँ कोई रूक्ष कफहर द्रव्य स्थिति बिगाड़ देता।

विबन्ध हेतु द्राक्षा

रात भर भिगोई मुनक्का एक मृदु गृह-विरेचक है, जो गर्भावस्था तथा बालकों में भी सुरक्षित है।

तृष्णा एवं दाह हेतु द्राक्षा

शास्त्रोक्त तृष्णानिग्रहण एवं दाहप्रशमन द्रव्य, जो उष्णता एवं अस्थिरता सहित ज्वर में प्रयुक्त होता है।

रोगोत्तर पुनर्लाभ में द्राक्षा

पोषक एवं सुपाच्य होने से पुनर्लाभ के समय दी जाती है, जब अरुचि हो और बल क्षीण।

रक्तपित्त में द्राक्षा

शीत एवं रक्त-प्रसादक होने से पित्तज मूल के रक्तस्राव-विकारों में प्रयुक्त।

पाण्डु हेतु द्राक्षा

पाण्डु में परम्परागत रूप से दी जाती है; भिगोई मुनक्का रक्ताल्पता का मानक गृह-उपाय है।

स्वरभेद हेतु द्राक्षा

जहाँ स्वर कर्कश या बैठा हो वहाँ प्रयुक्त; इसका माधुर्य कण्ठ को स्निग्ध करता है।

द्राक्षारिष्ट में द्राक्षा

दुर्बलता, कास एवं अरुचि में प्रयुक्त शास्त्रीय सन्धान-कल्प का प्रधान द्रव्य।

यकृत् हेतु द्राक्षा

कामला में योगों के भीतर प्रयुक्त; इसका शीत माधुर्य शोथयुक्त यकृत् के अनुकूल बैठता है।

वृष्य द्रव्य के रूप में द्राक्षा

प्रजनन-बल्य द्रव्यों में नामित, जो इसके सामान्य पोषक वर्गीकरण के अनुरूप है।

मात्रा — कितना लें

ताज़ा फल, मुनक्का, अथवा द्राक्षासव; भिगोई हुई मुनक्का शास्त्रोक्त मृदु बल्य है। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें।

मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।

पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर

उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।

द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?

इस संग्रह में द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: चरक संहिता (रसायन एवं Trishna प्रकरण); भावप्रकाश निघण्टु (आम्रादि फलवर्ग).

चरक संहिता में द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश के विषय में क्या कहा गया है?

बल एवं तृष्णा हेतु उल्लिखित। सन्दर्भ: चरक संहिता — रसायन एवं Trishna प्रकरण.

भावप्रकाश निघण्टु में द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश के विषय में क्या कहा गया है?

बृंहण एवं रसायन के रूप में वर्णित। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — आम्रादि फलवर्ग.

आयुर्वेद में द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?

मुनक्का बल्य द्रव्यों में मृदुतम है, जिसे जीवनीय एवं बृंहणीय कहा गया है। यह तृष्णा, दाह, शुष्क कास तथा स्वरभेद में, और ज्वर के पश्चात् आने वाली दुर्बलता में वहाँ प्रयुक्त होती है जहाँ कोई भारी बल्य सह्य न हो। यह मृदु विरेचक भी है और अनेक अरिष्टों का मधुर आधार बनती है।

द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?

रस मधुर, गुण गुरु, स्निग्ध, वीर्य शीत, विपाक मधुर. दोष-कर्म: वात और पित्त का शमन. प्रभाव: बृंहण (पोषक), रसायन.

द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?

द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश का वीर्य शीत है और विपाक मधुर — इसी से इसका कर्म बनता है: वात और पित्त का शमन.

द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?

प्रयोज्य अंग: फल.

द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?

ताज़ा फल, मुनक्का, अथवा द्राक्षासव; भिगोई हुई मुनक्का शास्त्रोक्त मृदु बल्य है। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।

द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश का प्रयोग कब वर्जित है?

आहार के रूप में अत्यन्त सुरक्षित; रोगोत्तर पुनर्लाभ का सामान्य बल्य।

द्राक्षा, मुनक्का/किशमिश कहाँ पाया जाता है?

अंगूर भारत के उष्णतर प्रदेशों में, विशेषतः महाराष्ट्र तथा उत्तर-पश्चिम में उगाए जाते हैं; मुनक्का उसी का शुष्क फल है।

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भावप्रकाश निघण्टु — आम्रादि फलवर्ग
    बृंहण एवं रसायन के रूप में वर्णित।
  • चरक संहिता — रसायन एवं Trishna प्रकरण
    बल एवं तृष्णा हेतु उल्लिखित।

Modern research

  1. Review of the pharmacological effects of Vitis vinifera (Grape) and its bioactive compounds (see source). Phytotherapy Research (2009)

    A review of the pharmacological effects of Vitis vinifera (Draksha / grape) and its polyphenols, including antioxidant, cardioprotective and hepatoprotective actions.

    View study doi:10.1002/ptr.2761

सुरक्षा एवं सावधानियाँ

आहार के रूप में अत्यन्त सुरक्षित; रोगोत्तर पुनर्लाभ का सामान्य बल्य।

प्राप्ति स्थान

अंगूर भारत के उष्णतर प्रदेशों में, विशेषतः महाराष्ट्र तथा उत्तर-पश्चिम में उगाए जाते हैं; मुनक्का उसी का शुष्क फल है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्राक्षा किसमें प्रयुक्त होती है?

द्राक्षा — अंगूर, प्रायः मुनक्का के रूप में — शुष्क कास, विबन्ध, तृष्णा एवं दाह, रक्ताल्पता, स्वरभेद तथा रोग के पश्चात् पुनर्लाभ में प्रयुक्त होती है। यह द्रव्यगुण के मृदुतम द्रव्यों में है और बालकों, वृद्धों तथा गर्भावस्था के अनुकूल है।

मुनक्का औषधीय रूप से कैसे लें?

10–20 मुनक्के रात भर जल में भिगोकर प्रातः उसी जल सहित लें। विबन्ध तथा बल-वृद्धि हेतु यही शास्त्रोक्त विधि है। द्राक्षा चूर्ण 3–6 ग्राम अथवा द्राक्षारिष्ट 15–30 मिली भोजनोपरान्त अन्य रूप हैं।

क्या मुनक्का विबन्ध में अच्छी है?

हाँ — रात भर भिगोकर यह एक मृदु, भली-भाँति स्थापित विरेचक है, जो बालकों तथा गर्भावस्था में भी पर्याप्त सुरक्षित है जहाँ प्रबल विरेचक वर्जित हैं। यह कोष्ठ को क्षुब्ध किए बिना मल को मृदु एवं भारी करके कार्य करती है।

द्राक्षारिष्ट क्या है?

अंगूर पर बना एक शास्त्रीय सन्धान-कल्प, जो दुर्बलता, अरुचि, कास तथा रक्ताल्पता में प्रयुक्त होता है। समस्त अरिष्टों की भाँति इसमें सन्धान के समय अल्प मद्य स्वतः उत्पन्न होता है, जो वाहक का कार्य करता है।

क्या गर्भावस्था में द्राक्षा ली जा सकती है?

भिगोई मुनक्का गर्भावस्था में विबन्ध तथा बल हेतु परम्परागत रूप से दी जाती है और सुरक्षित मानी जाती है। द्राक्षारिष्ट में स्वतः उत्पन्न मद्य होता है, अतः वह रूप लेने से पूर्व चिकित्सक से पूछें।

क्या द्राक्षा शुष्क कास में अच्छी है?

शुष्क, क्षुब्ध कास हेतु यह श्रेष्ठ चयनों में से एक है, क्योंकि यह रूक्ष नहीं, अपितु मधुर एवं स्निग्ध है। आर्द्र, अवरुद्ध कास को इसके विपरीत प्रकार का द्रव्य चाहिए।

क्या द्राक्षा के दुष्प्रभाव हैं?

अत्यन्त अल्प — यह मूलतः आहार है। मधुर एवं गुरु होने से यह कफ बढ़ा सकती है और अवरोध अथवा स्थौल्य हेतु कम उपयुक्त है। मधुमेह-रोगी शर्करा-मात्रा का ध्यान रखें।

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