चित्र: Sonja Pauen / Wikimedia Commons, Public domain
तेजपत्ता तेजपत्र
Cinnamomum tamala · Lauraceae
अन्य नाम: तेजपत्र, पत्र, तेजपत्ता, इण्डियन बे लीफ
प्रयोज्य अंग: पत्र
तेजपत्ता (Cinnamomum tamala) भारतीय तेजपत्र है, चतुर्जात के चार सुगन्धित द्रव्यों में से एक। यह उष्ण एवं पाचक है, जो अरुचि, आध्मान, कास तथा प्रमेह में प्रयुक्त होता है, और यूरोपीय पाक में प्रयुक्त भूमध्यसागरीय बे लीफ से भिन्न है।
| रस | कटु, मधुर, तिक्त |
|---|---|
| गुण | लघु, रूक्ष, तीक्ष्ण |
| वीर्य | उष्ण |
| विपाक | कटु |
| दोष-कर्म | कफ और वात का शमन |
| प्रभाव | दीपन, सुगन्धित |
सार-संक्षेप
- वानस्पतिक नाम: Cinnamomum tamala
- प्रयोज्य अंग: पत्र
- दोष-कर्म: कफ और वात का शमन
- सामान्य मात्रा: पत्र-चूर्ण 0.5–2 ग्राम; त्रिजातक तथा पाचन/श्वसन योगों का अंग।
तेजपत्ता के अन्य भाषाओं में नाम
परिचय
तेजपत्ता (भारतीय तेजपत्र, Cinnamomum tamala) एक सुगन्धित पत्र है जो पाचन प्रदीप्त करने तथा कफ का हरण करने हेतु प्रयुक्त होता है। दालचीनी का निकट सम्बन्धी होकर यह एक उष्ण दीपन द्रव्य तथा त्रिजातक का अंग है।
वर्गीकरण
लॉरेसी (Lauraceae) कुल का तेजपत्ता दीपन तथा सुगन्धित कफ-वात शामक द्रव्यों में वर्गीकृत है। इसका कटु रस, तीक्ष्ण गुण तथा उष्ण वीर्य अग्नि प्रदीप्त करते हैं और अवरोध का हरण करते हैं।
उपयोग एवं लाभ
तेजपत्ता एक उष्ण सुगन्धित द्रव्य है जो अरुचि, आध्मान तथा उत्क्लेश में, और उर के शीतजन्य अवरोध में प्रयुक्त होता है। यह दालचीनी एवं एला के साथ त्रिजातक समूह का एक अंग है, जिसे योगों में स्वादिष्ट बनाने तथा पाचन को सहारा देने हेतु मिलाया जाता है।
पाचन हेतु तेजपत्ता
अरुचि, आध्मान तथा अपूर्ण पाचन में प्रयुक्त एक दीपन एवं पाचन द्रव्य।
प्रमेह हेतु तेजपत्ता
प्रमेहहर द्रव्यों में नामित, जिसमें रक्त-शर्करा पर दालचीनी-कुल के प्रभावों को लेकर कुछ आधुनिक रुचि भी है।
कास हेतु तेजपत्ता
उष्ण एवं सुगन्धित होने से अवरोध सहित कफज कास में प्रयुक्त।
चतुर्जात में तेजपत्ता
एला, त्वक् एवं नागकेसर के साथ चार सुगन्धित द्रव्यों में से एक, जो स्वाद तथा अवशोषण हेतु योगों में मिलाया जाता है।
उत्क्लेश हेतु तेजपत्ता
पाचन-विकृति से जुड़े वमन तथा मिचली में प्रयुक्त।
मुख-दुर्गन्ध हेतु तेजपत्ता
इसकी सुगन्ध मुख-शोधक तथा मुख-कल्पों में प्रयुक्त होती है।
हृदय हेतु तेजपत्ता
शास्त्रों में हृद्य कहा गया है और कुछ हृदय-योगों में उपस्थित रहता है।
अर्श हेतु तेजपत्ता
उन योगों के भीतर अर्श में प्रयुक्त जहाँ मूल कारण पाचन हो।
त्वचा-विकारों हेतु तेजपत्ता
अपने कफ-हर कर्म के आधार पर जीर्ण त्वचा-विकारों में आन्तरिक रूप से प्रयुक्त।
शास्त्रीय योगों में तेजपत्ता
सितोपलादि चूर्ण, तालीसादि चूर्ण तथा चतुर्जात धारण करने वाले अधिकांश योगों में उपस्थित।
मात्रा — कितना लें
पत्र-चूर्ण 0.5–2 ग्राम; त्रिजातक तथा पाचन/श्वसन योगों का अंग। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें।
मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।
पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर
उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।
तेजपत्ता का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?
इस संग्रह में तेजपत्ता के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: भावप्रकाश निघण्टु (कर्पूरादि वर्ग); शार्ङ्गधर संहिता (Trijataka).
भावप्रकाश निघण्टु में तेजपत्ता के विषय में क्या कहा गया है?
दीपन एवं सुगन्धित के रूप में वर्णित; त्रिजातक का अंग। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — कर्पूरादि वर्ग.
शार्ङ्गधर संहिता में तेजपत्ता के विषय में क्या कहा गया है?
दालचीनी तथा एला के साथ एक शास्त्रीय घटक। सन्दर्भ: शार्ङ्गधर संहिता — Trijataka.
आयुर्वेद में तेजपत्ता किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?
तेजपत्ता एक उष्ण सुगन्धित द्रव्य है जो अरुचि, आध्मान तथा उत्क्लेश में, और उर के शीतजन्य अवरोध में प्रयुक्त होता है। यह दालचीनी एवं एला के साथ त्रिजातक समूह का एक अंग है, जिसे योगों में स्वादिष्ट बनाने तथा पाचन को सहारा देने हेतु मिलाया जाता है।
तेजपत्ता के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?
रस कटु, मधुर, तिक्त, गुण लघु, रूक्ष, तीक्ष्ण, वीर्य उष्ण, विपाक कटु. दोष-कर्म: कफ और वात का शमन. प्रभाव: दीपन, सुगन्धित.
तेजपत्ता को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?
द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। तेजपत्ता का वीर्य उष्ण है और विपाक कटु — इसी से इसका कर्म बनता है: कफ और वात का शमन.
तेजपत्ता का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?
प्रयोज्य अंग: पत्र.
तेजपत्ता की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?
पत्र-चूर्ण 0.5–2 ग्राम; त्रिजातक तथा पाचन/श्वसन योगों का अंग। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।
तेजपत्ता का प्रयोग कब वर्जित है?
आहारीय मसाले के रूप में सुरक्षित; बड़ी औषधीय मात्रा संयम से प्रयुक्त।
तेजपत्ता कहाँ पाया जाता है?
तेजपत्ता वृक्ष भारत के उप-हिमालयी तथा उत्तर-पूर्वी पहाड़ी वनों में उगता है।
शास्त्रीय सन्दर्भ
- भावप्रकाश निघण्टु — कर्पूरादि वर्ग
दीपन एवं सुगन्धित के रूप में वर्णित; त्रिजातक का अंग। - शार्ङ्गधर संहिता — Trijataka
दालचीनी तथा एला के साथ एक शास्त्रीय घटक।
Modern research
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GC-MS analysis and screening of antidiabetic, antioxidant and hypolipidemic potential of Cinnamomum tamala oil in streptozotocin-induced diabetes mellitus in rats
(see source). Asian Pacific Journal of Tropical Biomedicine (2012)
A study reporting Cinnamomum tamala (Tejpatta) leaf oil had antidiabetic, antioxidant and hypolipidaemic effects in diabetic rats.
View study doi:10.1186/1475-2840-11-95
सुरक्षा एवं सावधानियाँ
आहारीय मसाले के रूप में सुरक्षित; बड़ी औषधीय मात्रा संयम से प्रयुक्त।
प्राप्ति स्थान
तेजपत्ता वृक्ष भारत के उप-हिमालयी तथा उत्तर-पूर्वी पहाड़ी वनों में उगता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या तेजपत्ता और बे लीफ एक ही हैं?
नहीं। तेजपत्ता Cinnamomum tamala है, दालचीनी का सम्बन्धी, जिसमें लम्बाई में तीन स्पष्ट शिराएँ तथा दालचीनी-लवंग जैसी सुगन्ध होती है। भूमध्यसागरीय बे Laurus nobilis है, जिसमें एक ही मध्य शिरा तथा भिन्न गन्ध होती है। ये परस्पर विनिमेय नहीं हैं।
आयुर्वेद में तेजपत्ता किसमें प्रयुक्त होता है?
अरुचि, आध्मान, अपूर्ण पाचन, अवरोध सहित कास, उत्क्लेश तथा रक्त-शर्करा-सहारे में। यह चतुर्जात के चार सुगन्धित द्रव्यों में से एक है, जिसे स्वाद, अवशोषण तथा कफ-हर कर्म हेतु योगों में मिलाया जाता है।
तेजपत्ता की मात्रा क्या है?
पत्र-चूर्ण प्रतिदिन 1–3 ग्राम। इसे चिकित्सकीय मात्रा में अकेले लेने की अपेक्षा योगों के भीतर सहायक द्रव्य के रूप में अधिक प्रयुक्त किया जाता है। पाक-मात्रा हेतु कोई सीमा आवश्यक नहीं।
चतुर्जात क्या है?
चार सुगन्धित द्रव्यों का समूह — एला, त्वक्, तेजपत्ता तथा नागकेसर — जो स्वाद, अवशोषण तथा कफ-हर कर्म सुधारने हेतु शास्त्रीय योगों में मिलाया जाता है। ये अत्यन्त बड़ी संख्या के कल्पों में एक साथ आते हैं।
क्या तेजपत्ता प्रमेह में सहायक है?
यह शास्त्रीय प्रमेहहर द्रव्यों में नामित है, और दालचीनी-कुल पर रक्त-शर्करा सम्बन्धी कुछ आधुनिक अनुसन्धान भी है। इसे सहायक मानें — मापन जारी रखें, अपने चिकित्सक को बताएँ, और निर्धारित औषधि न घटाएँ।
क्या तेजपत्ता के दुष्प्रभाव हैं?
पाक अथवा शास्त्रीय मात्रा में अत्यल्प। यह उष्ण है, अतः बड़ी मात्रा पित्त बढ़ा सकती है। प्रमेह की औषधि लेने पर परामर्श लें, क्योंकि प्रभाव संचित हो सकते हैं।
असली तेजपत्ता की पहचान कैसे करें?
पत्र की लम्बाई में चलने वाली तीन स्पष्ट शिराओं तथा मसलने पर आने वाली दालचीनी-सदृश सुगन्ध से। भूमध्यसागरीय बे में एक ही मध्य शिरा तथा अधिक तीक्ष्ण, ओषधीय गन्ध होती है।