बहेड़ा (Terminalia bellirica) — fruit
बहेड़ा — Terminalia bellirica. प्रयोज्य अंग: फल.
चित्र: J.M.Garg / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0
आयुर्वेदीय द्रव्य

बहेड़ा बिभीतकी

Terminalia bellirica · Combretaceae

अन्य नाम: बहेड़ा, बहेरा, बिभीतक

प्रयोज्य अंग: फल

बिभीतकी (Terminalia bellirica) त्रिफला के तीन फलों में दूसरा है। आयुर्वेद इसे मुख्यतः श्वसन-मार्ग हेतु — कास, अवरोध तथा स्वरभेद में — और कफ-निर्हरक द्रव्य के रूप में प्रयुक्त करता है। इसके नाम का अर्थ "जो रोग से मुक्त रखे" लिया जाता है, और यह त्रिफला-त्रयी का रूक्ष घटक है।

बहेड़ा — आयुर्वेदीय गुण-कर्म
रसकषाय
गुणलघु, रूक्ष
वीर्यउष्ण
विपाकमधुर
दोष-कर्मत्रिदोषहर — तीनों दोषों का शमन, विशेषतः कफ शामक
प्रभावरसायन, चाक्षुष्य (नेत्र)

सार-संक्षेप

  • वानस्पतिक नाम: Terminalia bellirica
  • प्रयोज्य अंग: फल
  • दोष-कर्म: त्रिदोषहर — तीनों दोषों का शमन, विशेषतः कफ शामक
  • सामान्य मात्रा: फल चूर्ण 2–4 ग्राम, प्रायः त्रिफला के भीतर; कास हेतु अकेले मधु के साथ भी लिया जाता है।

बहेड़ा के अन्य भाषाओं में नाम

हिन्दीबहेड़ा
अंग्रेज़ीBeleric Myrobalan
संस्कृतबिभीतकी, अक्ष
बंगालीবহেড়া
गुजरातीબહેડાં
मराठीबेहडा
तमिलதான்றி
तेलुगुతానికాయ
कन्नड़ತಾರೆ ಕಾಯಿ
लैटिन (वानस्पतिक)Terminalia bellirica

परिचय

बिभीतकी (Terminalia bellirica) त्रिफला के तीन फलों में दूसरा है, जो नेत्र, केश, स्वर तथा फुफ्फुस हेतु मान्य है। कषाय एवं कायाकल्पकारी होकर यह कफ का शमन करता है और श्वसन-मार्ग को सहारा देता है।

वर्गीकरण

कॉम्ब्रेटेसी (Combretaceae) कुल का यह द्रव्य रसायन तथा चाक्षुष्य (नेत्र-हितकर) द्रव्यों में वर्गीकृत है। इसका कषाय रस, लघु-रूक्ष गुण एवं उष्ण वीर्य कफ का शमन करते हुए धातुओं का पोषण भी करते हैं।

उपयोग एवं लाभ

त्रिफला के तीन फलों में से एक। बिभीतकी मुख्यतः कफ-द्रव्य है, जो कास, स्वरभेद तथा उर एवं कण्ठ के अवरोध में प्रयुक्त होता है, और शास्त्रों में इसे चाक्षुष्य — नेत्रों हेतु हितकर — कहा गया है। यह कृमि-रोग में तथा त्रिफला के भीतर मृदु विरेचक के रूप में भी दिया जाता है।

कास एवं अवरोध हेतु बिभीतकी

इसका प्रधान प्रयोग। रूक्ष एवं कफ-निर्हरक होने से यह घने कफ को पतला करता है, और त्रिफला-वर्ग का श्वसन-सम्बन्धी घटक है।

स्वरभेद हेतु बिभीतकी

फल को चूसना अथवा क्वाथ रूप में लेना कर्कश या बैठे स्वर हेतु शास्त्रोक्त उपाय है — भारत में गायक आज भी इस पर भरोसा करते हैं।

नेत्रों हेतु बिभीतकी

चाक्षुष्य के रूप में वर्णित, थके एवं शोथयुक्त नेत्रों में आन्तरिक रूप से तथा प्रक्षालन रूप में प्रयुक्त।

केश हेतु बिभीतकी

केश-तैलों एवं प्रक्षालनों में प्रयुक्त, परम्परागत रूप से आमलकी तथा भृंगराज के साथ केश को दृढ़ करने एवं पलितता घटाने हेतु।

त्रिफला में बिभीतकी

रूक्ष, कफ-शामक घटक। त्रिफला का सन्तुलन उस पर उतना ही निर्भर है जितना आमलकी की शीतलता तथा हरीतकी की गति पर।

पाचन हेतु बिभीतकी

कषाय एवं मृदु विरेचक होने से अनियमित कोष्ठ में प्रयुक्त, अकेले नहीं अपितु योगों के भीतर।

अतिसार हेतु बिभीतकी

इसकी कषायता द्रव मल को रोकती है, जो भिन्न मात्रा में उसके मृदु विरेचक प्रभाव के साथ ही रहती है — Terminalia फलों में यह प्रचलित प्रवृत्ति है।

कृमि हेतु बिभीतकी

शास्त्रों में कृमिघ्न द्रव्यों में नामित।

श्वास हेतु बिभीतकी

श्वास में वहाँ प्रयुक्त जहाँ चित्र शुष्क संकोच का नहीं, अपितु घने अवरोध का हो।

रसायन के रूप में बिभीतकी

त्रिफला के अंग के रूप में दीर्घकाल तक लिया जाता है, जिससे उसका वर्गीकरण केवल विरेचक नहीं, अपितु कायाकल्पकारी के रूप में बनता है।

मात्रा — कितना लें

फल चूर्ण 2–4 ग्राम, प्रायः त्रिफला के भीतर; कास हेतु अकेले मधु के साथ भी लिया जाता है। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें।

मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।

पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर

उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।

बहेड़ा का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?

इस संग्रह में बहेड़ा के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: भावप्रकाश निघण्टु (हरीतक्यादि वर्ग); शार्ङ्गधर संहिता (त्रिफला).

भावप्रकाश निघण्टु में बहेड़ा के विषय में क्या कहा गया है?

रसायन एवं चाक्षुष्य के रूप में वर्णित। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — हरीतक्यादि वर्ग.

शार्ङ्गधर संहिता में बहेड़ा के विषय में क्या कहा गया है?

त्रिफला के तीन फलों में से एक। सन्दर्भ: शार्ङ्गधर संहिता — त्रिफला.

आयुर्वेद में बहेड़ा किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?

त्रिफला के तीन फलों में से एक। बिभीतकी मुख्यतः कफ-द्रव्य है, जो कास, स्वरभेद तथा उर एवं कण्ठ के अवरोध में प्रयुक्त होता है, और शास्त्रों में इसे चाक्षुष्य — नेत्रों हेतु हितकर — कहा गया है। यह कृमि-रोग में तथा त्रिफला के भीतर मृदु विरेचक के रूप में भी दिया जाता है।

बहेड़ा के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?

रस कषाय, गुण लघु, रूक्ष, वीर्य उष्ण, विपाक मधुर. दोष-कर्म: त्रिदोषहर — तीनों दोषों का शमन, विशेषतः कफ शामक. प्रभाव: रसायन, चाक्षुष्य (नेत्र).

बहेड़ा को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?

द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। बहेड़ा का वीर्य उष्ण है और विपाक मधुर — इसी से इसका कर्म बनता है: त्रिदोषहर — तीनों दोषों का शमन, विशेषतः कफ शामक.

बहेड़ा का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?

प्रयोज्य अंग: फल.

बहेड़ा की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?

फल चूर्ण 2–4 ग्राम, प्रायः त्रिफला के भीतर; कास हेतु अकेले मधु के साथ भी लिया जाता है। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।

बहेड़ा का प्रयोग कब वर्जित है?

शास्त्रोक्त मात्रा में सामान्यतः सुरक्षित; गर्भावस्था में निर्देशन में ही प्रयोग करें।

बहेड़ा कहाँ पाया जाता है?

बिभीतकी भारत तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के मैदानों एवं निचली पहाड़ियों का एक बड़ा पर्णपाती वृक्ष है।

बहेड़ा किन शास्त्रीय योगों में सम्मिलित है?

Triphala.

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भावप्रकाश निघण्टु — हरीतक्यादि वर्ग
    रसायन एवं चाक्षुष्य के रूप में वर्णित।
  • शार्ङ्गधर संहिता — त्रिफला
    त्रिफला के तीन फलों में से एक।

Modern research

  1. A randomized, double-blind, positive-controlled, dose-response clinical study of an aqueous extract of Terminalia bellerica in lowering uric acid and creatinine in chronic kidney disease subjects with hyperuricemia (see source). BMC Complementary Medicine and Therapies (2020)

    A dose-response RCT reporting Terminalia bellerica (Bibhitaki) extract lowered uric acid and creatinine in CKD subjects with hyperuricemia.

    View study doi:10.1186/s12906-020-03071-7
  2. A randomized, double-blind, placebo- and positive-controlled clinical pilot study to evaluate standardized aqueous extracts of Terminalia chebula and Terminalia bellerica in subjects with hyperuricemia (see source). Journal of Ayurveda and Integrative Medicine (2016)

    A 24-week RCT (n=110) reporting standardized Terminalia bellerica (Bibhitaki, with T. chebula) extract reduced serum uric acid in subjects with hyperuricemia.

    View study doi:10.2147/CPAA.S100521

सुरक्षा एवं सावधानियाँ

शास्त्रोक्त मात्रा में सामान्यतः सुरक्षित; गर्भावस्था में निर्देशन में ही प्रयोग करें।

प्राप्ति स्थान

बिभीतकी भारत तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के मैदानों एवं निचली पहाड़ियों का एक बड़ा पर्णपाती वृक्ष है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिभीतकी किसमें प्रयुक्त होती है?

बिभीतकी मुख्यतः श्वसन-मार्ग हेतु प्रयुक्त होती है — कास, घना अवरोध, स्वरभेद तथा श्वास — और त्रिफला के तीन फलों में से एक के रूप में। यह नेत्र, केश तथा अनियमित कोष्ठ में भी प्रयुक्त होती है।

बिभीतकी की मात्रा क्या है?

फल चूर्ण प्रतिदिन 3–6 ग्राम, मधु अथवा उष्ण जल के साथ। त्रिफला के अंग के रूप में प्रायः रात्रि में 3–5 ग्राम। स्वरभेद में फल को चूर्ण की भाँति निगलने के स्थान पर परम्परागत रूप से धीरे-धीरे चूसा जाता है।

त्रिफला के तीन फल कौन-से हैं?

आमलकी (Phyllanthus emblica), बिभीतकी (Terminalia bellirica) तथा हरीतकी (Terminalia chebula), शास्त्रोक्त रूप से समान भाग में। आमलकी शीतल करती है, बिभीतकी रूक्ष कर कफ हरती है, हरीतकी कोष्ठ को गति देती है — सन्तुलन ही मूल बात है।

क्या बिभीतकी और बहेड़ा एक ही हैं?

हाँ। बहेड़ा हिन्दी नाम है और बिभीतकी संस्कृत, दोनों Terminalia bellirica के लिए। अंग्रेज़ी में इसे बेलेरिक मायरोबालन कहा जाता है।

क्या बिभीतकी के दुष्प्रभाव हैं?

योग के भीतर शास्त्रोक्त मात्रा में सुसह्य। यह रूक्ष है, अतः दीर्घ एवं अधिक प्रयोग वात बढ़ा सकता है तथा रूक्षता या विबन्ध कर सकता है। गर्भावस्था में चिकित्सक से परामर्श लें। बीज-मज्जा प्रयुक्त नहीं होती और उसे नहीं खाना चाहिए।

क्या बिभीतकी प्रतिदिन ली जा सकती है?

इसे सामान्यतः अकेले नहीं, अपितु त्रिफला के अंग के रूप में प्रतिदिन लिया जाता है, और वह संयोग दीर्घकालीन प्रयोग हेतु ही बना है। अकेले लेने पर इसे किसी विशिष्ट श्वसन-विकार हेतु क्रमों में लेना श्रेष्ठ है।

क्या बिभीतकी फुफ्फुस हेतु अच्छी है?

यह त्रिफला-वर्ग का श्वसन-सम्बन्धी घटक है, जो घने कफ सहित कास, अवरोध तथा स्वरभेद में प्रयुक्त होता है। यह आर्द्र, अवरुद्ध चित्र के अनुकूल है, न कि शुष्क, क्षोभयुक्त कास के, जहाँ कोई स्निग्ध द्रव्य श्रेष्ठ चयन होगा।

इनका घटक: Triphala

Triphala Churna — pack shot

Triphala Churna

त्रिफला चूर्ण (Triphalā Cūrṇa)
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