चित्र: J.M.Garg / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0
हरड़, हरीतकी हरीतकी
Terminalia chebula · Combretaceae
अन्य नाम: हरड़, हरे, बड़ी हरड़, हरीतकी
प्रयोज्य अंग: फल
हरीतकी (Terminalia chebula) त्रिफला का तीसरा फल है और वह द्रव्य जिसे आयुर्वेद औषधियों का राजा कहता है। यह विबन्ध, पाचन, कृमि, कास तथा रसायन के रूप में प्रयुक्त होती है। असामान्य रूप से इसमें छह में से पाँच रस होते हैं — लवण को छोड़कर सभी — और इसे शरीर के लिए माता के समान कहा गया है।
| रस | कषाय (प्रधान), लवण को छोड़कर पाँचों रस |
|---|---|
| गुण | लघु, रूक्ष |
| वीर्य | उष्ण |
| विपाक | मधुर |
| दोष-कर्म | त्रिदोषहर — तीनों दोषों का शमन, विशेषतः वात शामक |
| प्रभाव | रसायन, अनुलोमन |
सार-संक्षेप
- वानस्पतिक नाम: Terminalia chebula
- प्रयोज्य अंग: फल
- दोष-कर्म: त्रिदोषहर — तीनों दोषों का शमन, विशेषतः वात शामक
- सामान्य मात्रा: चूर्ण: 2–5 ग्राम, प्रायः रात्रि में।
हरड़, हरीतकी के अन्य भाषाओं में नाम
परिचय
हरीतकी (Terminalia chebula) आयुर्वेद में "औषधियों का राजा" कही जाती है और त्रिफला के तीन फलों में प्रथम है। रसायन तथा कोष्ठ की मृदु नियामक के रूप में पूजनीय, यह भैषज्य-गुरु बुद्ध के हाथों में चित्रित होती है और अगणित शास्त्रीय योगों में सम्मिलित है।
वर्गीकरण
वानस्पतिक दृष्टि से कॉम्ब्रेटेसी (Combretaceae) कुल की हरीतकी भावप्रकाश निघण्टु के हरीतक्यादि वर्ग में द्रव्यगुण के सर्वप्रथम स्थान पर वर्णित है। इसमें छह में से पाँच रस (लवण को छोड़कर सभी) होते हैं, जिनमें कषाय प्रधान है, तथा उष्ण वीर्य एवं मधुर विपाक।
उपयोग एवं लाभ
परम्परागत रूप से कोष्ठ को नियमित करने एवं विबन्ध दूर करने, अग्नि प्रदीप्त करने, आम का हरण करने, फुफ्फुस एवं स्वर को सहारा देने तथा व्यापक रसायन के रूप में प्रयुक्त। यह विशेषतः वात के सन्तुलन हेतु मान्य है और त्रिफला तथा अभयारिष्ट का प्रमुख घटक है।
विबन्ध हेतु हरीतकी
इसका प्रमुखतम प्रयोग। एक ही समय में मृदु विरेचक तथा कोष्ठ-बल्य होने से यह उत्तेजक विरेचक की भाँति निर्भरता उत्पन्न नहीं करती।
पाचन हेतु हरीतकी
दीपन एवं पाचन, जो अरुचि, आध्मान तथा अपूर्ण पाचन में प्रयुक्त होती है।
त्रिफला में हरीतकी
तीन फलों में गति देने वाला घटक, जो आमलकी एवं बिभीतकी में अनुपस्थित अधोगामी कर्म प्रदान करता है।
रसायन के रूप में हरीतकी
चरक के रसायन अध्याय में नामित और धातु-गुणवत्ता एवं दीर्घायु हेतु दीर्घकाल तक ली जाती है।
कास हेतु हरीतकी
कास एवं स्वरभेद में प्रयुक्त; फल को धीरे-धीरे चूसा जाता है अथवा मधु के साथ लिया जाता है।
कृमि हेतु हरीतकी
एक कृमिघ्न द्रव्य, जो आन्त्र-कृमियों को बाहर निकालता है।
नेत्रों हेतु हरीतकी
चाक्षुष्य कही गई है; आन्तरिक रूप से तथा नेत्र-प्रक्षालन के रूप में प्रयुक्त।
त्वचा हेतु हरीतकी
इस शास्त्रीय सिद्धान्त पर जीर्ण त्वचा-रोग में प्रयुक्त कि कोष्ठ-शुद्धि से त्वचा निर्मल होती है।
अर्श हेतु हरीतकी
अर्श में प्रयुक्त; यह मल को मृदु कर उस प्रवाहण को घटाती है जो अवस्था को बनाए रखता है।
भिन्न अनुपानों के साथ हरीतकी
शास्त्रीय परम्परा ऋतु एवं व्याधि के अनुसार अनुपान बदलती है — वात में सैन्धव लवण, पित्त में शर्करा, कफ में मधु के साथ।
मात्रा — कितना लें
चूर्ण: 2–5 ग्राम, प्रायः रात्रि में। शास्त्रोक्त अनुपान ऋतु एवं प्रयोजन के अनुसार बदलता है (गुड़, घृत, सैन्धव लवण अथवा उष्ण जल के साथ)। निर्देशन में प्रयोग करें, तथा निर्जलीकरण या गर्भावस्था में वर्जित रखें।
मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।
पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर
उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।
हरड़, हरीतकी का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?
इस संग्रह में हरड़, हरीतकी के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: सुश्रुत संहिता (रसायन एवं अनुलोमन); भावप्रकाश निघण्टु (हरीतक्यादि वर्ग).
सुश्रुत संहिता में हरड़, हरीतकी के विषय में क्या कहा गया है?
चिकित्सा प्रकरणों में व्यापक रूप से उल्लिखित। सन्दर्भ: सुश्रुत संहिता — रसायन एवं अनुलोमन.
भावप्रकाश निघण्टु में हरड़, हरीतकी के विषय में क्या कहा गया है?
विस्तृत गुणों सहित प्रथम उल्लिखित। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — हरीतक्यादि वर्ग.
आयुर्वेद में हरड़, हरीतकी किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?
परम्परागत रूप से कोष्ठ को नियमित करने एवं विबन्ध दूर करने, अग्नि प्रदीप्त करने, आम का हरण करने, फुफ्फुस एवं स्वर को सहारा देने तथा व्यापक रसायन के रूप में प्रयुक्त। यह विशेषतः वात के सन्तुलन हेतु मान्य है और त्रिफला तथा अभयारिष्ट का प्रमुख घटक है।
हरड़, हरीतकी के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?
रस कषाय (प्रधान), लवण को छोड़कर पाँचों रस, गुण लघु, रूक्ष, वीर्य उष्ण, विपाक मधुर. दोष-कर्म: त्रिदोषहर — तीनों दोषों का शमन, विशेषतः वात शामक. प्रभाव: रसायन, अनुलोमन.
हरड़, हरीतकी को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?
द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। हरड़, हरीतकी का वीर्य उष्ण है और विपाक मधुर — इसी से इसका कर्म बनता है: त्रिदोषहर — तीनों दोषों का शमन, विशेषतः वात शामक.
हरड़, हरीतकी का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?
प्रयोज्य अंग: फल.
हरड़, हरीतकी की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?
चूर्ण: 2–5 ग्राम, प्रायः रात्रि में। शास्त्रोक्त अनुपान ऋतु एवं प्रयोजन के अनुसार बदलता है (गुड़, घृत, सैन्धव लवण अथवा उष्ण जल के साथ)। निर्देशन में प्रयोग करें, तथा निर्जलीकरण या गर्भावस्था में वर्जित रखें। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।
हरड़, हरीतकी का प्रयोग कब वर्जित है?
शास्त्रोक्त मात्रा में सामान्यतः सुरक्षित। अत्यधिक रूक्षता, निर्जलीकरण अथवा गर्भावस्था में बिना निर्देशन वर्जित। अत्यन्त कृश अथवा क्षीण व्यक्ति संयम से प्रयोग करें। चिकित्सीय प्रयोग हेतु चिकित्सक से परामर्श लें।
हरड़, हरीतकी कहाँ पाया जाता है?
हरीतकी दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के मूल निवासी एक बड़े पर्णपाती वृक्ष का फल है, जो उत्तर प्रदेश से दक्षिण तक भारत के उप-हिमालयी क्षेत्रों तथा पर्णपाती वनों में सामान्य है।
हरड़, हरीतकी किन शास्त्रीय योगों में सम्मिलित है?
Triphala.
शास्त्रीय सन्दर्भ
- भावप्रकाश निघण्टु — हरीतक्यादि वर्ग
विस्तृत गुणों सहित प्रथम उल्लिखित। - चरक एवं सुश्रुत संहिता — रसायन एवं अनुलोमन
चिकित्सा प्रकरणों में व्यापक रूप से उल्लिखित।
Modern research
-
Effects of a standardized aqueous extract of Terminalia chebula fruit (AyuFlex) on joint mobility, comfort, and functional capacity in healthy overweight subjects: a randomized placebo-controlled clinical trial
Lopez HL, Habowski SM, Sandrock JE, et al.. BMC Complementary and Alternative Medicine (2017)
An 84-day randomized placebo-controlled trial (n=105) reporting improvements in joint mobility and comfort with standardized Terminalia chebula (Haritaki) fruit extract.
View study doi:10.1186/s12906-017-1977-8 -
A randomized, double-blind, placebo-controlled, cross-over study to evaluate analgesic activity of Terminalia chebula in healthy human volunteers using a mechanical pain model
(see source). Journal of Ayurveda and Integrative Medicine (2016)
A cross-over RCT in healthy volunteers evaluating the analgesic activity of Terminalia chebula against a mechanical pain model.
View study doi:10.4103/0970-9185.173365
सुरक्षा एवं सावधानियाँ
शास्त्रोक्त मात्रा में सामान्यतः सुरक्षित। अत्यधिक रूक्षता, निर्जलीकरण अथवा गर्भावस्था में बिना निर्देशन वर्जित। अत्यन्त कृश अथवा क्षीण व्यक्ति संयम से प्रयोग करें। चिकित्सीय प्रयोग हेतु चिकित्सक से परामर्श लें।
प्राप्ति स्थान
हरीतकी दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के मूल निवासी एक बड़े पर्णपाती वृक्ष का फल है, जो उत्तर प्रदेश से दक्षिण तक भारत के उप-हिमालयी क्षेत्रों तथा पर्णपाती वनों में सामान्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरीतकी किसमें प्रयुक्त होती है?
हरीतकी विबन्ध, मन्दाग्नि, कृमि, कास, अर्श, जीर्ण त्वचा-रोग तथा नेत्र-विकारों में, और दीर्घकाल तक ली जाने वाली रसायन के रूप में प्रयुक्त होती है। यह त्रिफला का प्रधान फल है और शास्त्रों में इसे औषधियों का राजा कहा गया है।
हरीतकी की मात्रा क्या है?
फल चूर्ण प्रतिदिन 3–6 ग्राम, प्रायः रात्रि में उष्ण जल के साथ। त्रिफला के अंग के रूप में रात्रि में 3–5 ग्राम। शास्त्र प्रकृति एवं ऋतु के अनुसार अनुपान — सैन्धव लवण, शर्करा या मधु — बदलते हैं।
क्या हरीतकी दैनिक प्रयोग हेतु सुरक्षित है?
यह उन थोड़े-से विरेचक द्रव्यों में है जिन्हें शास्त्रों ने दीर्घकालीन प्रयोग हेतु अनुमत किया है, क्योंकि यह कोष्ठ को क्षुब्ध करने के स्थान पर उसका बल बढ़ाती है। फिर भी बीच-बीच में विराम लें, और किसी अनुपचारित कारण वाले विबन्ध को ढकने हेतु कोई विरेचक न लें।
हरीतकी किसे नहीं लेनी चाहिए?
गर्भावस्था, गम्भीर निर्जलीकरण, तीव्र अतिसार तथा अत्यधिक दुर्बलता या कार्श्य में वर्जित — शास्त्र स्पष्ट हैं कि क्षीण रोगी को विरेचन नहीं देना चाहिए। मधुमेह होने पर परामर्श लें, क्योंकि यह रक्त-शर्करा को प्रभावित करती है।
क्या हरीतकी और हरड़ एक ही हैं?
हाँ। हरड़ हिन्दी नाम है और हरीतकी संस्कृत, दोनों Terminalia chebula के लिए। अंग्रेज़ी में इसे चेबुलिक मायरोबालन अथवा ब्लैक मायरोबालन कहते हैं।
हरीतकी को औषधियों का राजा क्यों कहते हैं?
क्योंकि इसमें छह में से पाँच रस हैं, यह तीनों दोषों पर कार्य करती है, और शोधन तथा कायाकल्प, दोनों करती है — यह दुर्लभ संयोग है। चरक इसकी तुलना माता से करते हैं, इस आधार पर कि यह सुधार करते हुए पोषण भी करती है।
क्या हरीतकी से अन्य विरेचकों जैसी निर्भरता होती है?
ऐसा नहीं माना जाता, क्योंकि यह कोष्ठ को आक्षेप में धकेलकर नहीं, अपितु उसका बल बढ़ाकर कार्य करती है। हरीतकी तथा दन्ती जैसे तीव्र विरेचकों के बीच शास्त्रीय भेद यही है, और इसीलिए त्रिफला दीर्घकाल तक ली जाती है।
इनका घटक: Triphala