सोंठ (सूखी अदरक) (Zingiber officinale) — rhizome
सोंठ (सूखी अदरक) — Zingiber officinale. प्रयोज्य अंग: प्रकन्द.
चित्र: Olli Salmela, ( Dacnoh ) / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0
आयुर्वेदीय द्रव्य

सोंठ (सूखी अदरक) शुण्ठी

Zingiber officinale · Zingiberaceae

अन्य नाम: सोंठ, शुण्ठी, अदरक, सूखी अदरक

प्रयोज्य अंग: प्रकन्द

शुण्ठी (Zingiber officinale) सोंठ है, जिसे आयुर्वेद ताज़े प्रकन्द से पृथक् द्रव्य मानता है। यह त्रिकटु के तीन कटु द्रव्यों में से एक है, और अजीर्ण, उत्क्लेश, कास तथा सन्धि-शूल में प्रयुक्त होती है। यहाँ के किसी भी द्रव्य की तुलना में अदरक के पक्ष में आधुनिक प्रमाण सर्वाधिक प्रबल हैं, विशेषतः उत्क्लेश में।

सोंठ (सूखी अदरक) — आयुर्वेदीय गुण-कर्म
रसकटु
गुणलघु, स्निग्ध
वीर्यउष्ण
विपाकमधुर
दोष-कर्मवात और कफ का शमन
प्रभावदीपन, पाचन (पाचक)

सार-संक्षेप

  • वानस्पतिक नाम: Zingiber officinale
  • प्रयोज्य अंग: प्रकन्द
  • दोष-कर्म: वात और कफ का शमन
  • सामान्य मात्रा: सोंठ चूर्ण 1–2 ग्राम उष्ण जल अथवा मधु के साथ; ताज़े अदरक का स्वरस भी प्रयुक्त होता है।

सोंठ (सूखी अदरक) के अन्य भाषाओं में नाम

हिन्दीसोंठ (सूखी अदरक)
अंग्रेज़ीDry Ginger
संस्कृतशुण्ठी, नागर, विश्वभेषज
बंगालीশুঁঠ
गुजरातीસૂંઠ
मराठीसुंठ
तमिलசுக்கு
तेलुगुశొంఠి
कन्नड़ಶುಂಠಿ
मलयालमചുക്ക്
लैटिन (वानस्पतिक)Zingiber officinale

परिचय

शुण्ठी (सोंठ, Zingiber officinale) को विश्वभेषज, अर्थात् "सार्वभौम औषधि" कहा गया है। उष्ण एवं पाचक होकर यह अग्नि प्रदीप्त करती है, आम का हरण करती है और आमाशय को शान्ति देती है — त्रिकटु तथा अगणित शास्त्रीय योगों की आधारशिला।

वर्गीकरण

ज़िंजिबरेसी (Zingiberaceae) कुल की शुण्ठी दीपन-पाचन तथा वात-कफ शामक द्रव्यों में वर्गीकृत है। इसका कटु रस एवं उष्ण वीर्य अग्नि प्रज्वलित करते हैं; रोचक रूप से इसका विपाक मधुर है, जिससे यह क्षय करने के स्थान पर पोषण करती है।

उपयोग एवं लाभ

सोंठ गृह-प्रयोग का दीपन एवं पाचन द्रव्य है, जो अरुचि, अजीर्ण, उत्क्लेश तथा शीतजन्य अवरोध में प्रयुक्त होती है। यह त्रिकटु के तीन द्रव्यों में से एक है, और जकड़न सहित सन्धि-शूल हेतु आमवात में दी जाती है। सोंठ ताज़े अदरक से अधिक उष्ण एवं रूक्ष है।

उत्क्लेश हेतु शुण्ठी

वह प्रयोग जिसके पक्ष में आधुनिक प्रमाण सर्वाधिक प्रबल हैं — गर्भावस्था-जन्य, शल्योत्तर तथा यात्रा-जन्य उत्क्लेश में प्रभावी।

अजीर्ण हेतु शुण्ठी

अरुचि, आध्मान तथा भोजनोपरान्त गौरव हेतु एक प्रधान दीपन एवं पाचन द्रव्य।

कास हेतु शुण्ठी

उष्ण एवं रूक्ष होने से घने अवरोध सहित कफज कास में प्रयुक्त, जो मधु के साथ ली जाती है।

सन्धि-शूल हेतु शुण्ठी

आमवात तथा अस्थिसन्धिशोथ में प्रयुक्त, जिसके शूल-न्यूनन हेतु उचित आधुनिक प्रमाण हैं।

त्रिकटु में शुण्ठी

मरिच एवं पिप्पली के साथ तीन कटु द्रव्यों में से एक — शास्त्रोक्त पाचक संयोग।

कष्टार्तव हेतु शुण्ठी

परीक्षणों में इसे प्राथमिक कष्टार्तव में मेफ़ेनैमिक अम्ल के तुल्य पाया गया है।

प्रतिश्याय हेतु शुण्ठी

मधु एवं तुलसी सहित अदरक की चाय भारत का मानक गृह-उपाय है, और उचित भी।

अनुपान के रूप में शुण्ठी

अन्य द्रव्यों के वाहक के रूप में प्रयुक्त, जो उनका पाचन एवं अवशोषण सुधारती है।

शिरःशूल हेतु शुण्ठी

अदरक का लेप ललाट पर लगाना शीतजन्य शिरःशूल का पारम्परिक उपाय है।

शास्त्रीय योगों में शुण्ठी

आयुर्वेदीय भैषज्य-संग्रह के अत्यन्त बड़े भाग में उपस्थित — विरले ही कोई योग इसे छोड़ता है।

मात्रा — कितना लें

सोंठ चूर्ण 1–2 ग्राम उष्ण जल अथवा मधु के साथ; ताज़े अदरक का स्वरस भी प्रयुक्त होता है। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें।

मात्रा आयु, प्रकृति और अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।

पारम्परिक प्रयोग — शास्त्रों के आधार पर प्रश्नोत्तर

उत्तर इस द्रव्य के लिए अंकित सन्दर्भों तथा गुण-कर्म से लिए गए हैं। कोई ऐसा अध्याय-श्लोक सन्दर्भ नहीं दिया गया जो अभिलेख में न हो।

सोंठ (सूखी अदरक) का वर्णन किन शास्त्रीय ग्रन्थों में मिलता है?

इस संग्रह में सोंठ (सूखी अदरक) के लिए निम्न ग्रन्थों के सन्दर्भ अंकित हैं: चरक संहिता (दीपनीय एवं त्रिकटु प्रकरण); भावप्रकाश निघण्टु (हरीतक्यादि वर्ग).

चरक संहिता में सोंठ (सूखी अदरक) के विषय में क्या कहा गया है?

श्रेष्ठ पाचक द्रव्यों में उल्लिखित। सन्दर्भ: चरक संहिता — दीपनीय एवं त्रिकटु प्रकरण.

भावप्रकाश निघण्टु में सोंठ (सूखी अदरक) के विषय में क्या कहा गया है?

विश्वभेषज, अर्थात् सार्वभौम औषधि, के रूप में प्रशंसित। सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु — हरीतक्यादि वर्ग.

आयुर्वेद में सोंठ (सूखी अदरक) किन स्थितियों में प्रयुक्त होता है?

सोंठ गृह-प्रयोग का दीपन एवं पाचन द्रव्य है, जो अरुचि, अजीर्ण, उत्क्लेश तथा शीतजन्य अवरोध में प्रयुक्त होती है। यह त्रिकटु के तीन द्रव्यों में से एक है, और जकड़न सहित सन्धि-शूल हेतु आमवात में दी जाती है। सोंठ ताज़े अदरक से अधिक उष्ण एवं रूक्ष है।

सोंठ (सूखी अदरक) के आयुर्वेदीय गुण-कर्म क्या हैं?

रस कटु, गुण लघु, स्निग्ध, वीर्य उष्ण, विपाक मधुर. दोष-कर्म: वात और कफ का शमन. प्रभाव: दीपन, पाचन (पाचक).

सोंठ (सूखी अदरक) को यह दोष-कर्म क्यों दिया गया है?

द्रव्यगुण में दोष-कर्म रस, गुण, वीर्य एवं विपाक से निकलता है। सोंठ (सूखी अदरक) का वीर्य उष्ण है और विपाक मधुर — इसी से इसका कर्म बनता है: वात और कफ का शमन.

सोंठ (सूखी अदरक) का कौन-सा अंग औषधि रूप में प्रयुक्त होता है?

प्रयोज्य अंग: प्रकन्द.

सोंठ (सूखी अदरक) की शास्त्रोक्त मात्रा कितनी है?

सोंठ चूर्ण 1–2 ग्राम उष्ण जल अथवा मधु के साथ; ताज़े अदरक का स्वरस भी प्रयुक्त होता है। अपने वैद्य के परामर्श का पालन करें। मात्रा आयु, प्रकृति एवं अवस्था के अनुसार बदलती है — योग्य वैद्य से पुष्टि अवश्य करें।

सोंठ (सूखी अदरक) का प्रयोग कब वर्जित है?

सामान्यतः सुरक्षित; बड़ी मात्रा पित्त, व्रण अथवा रक्तस्राव बढ़ा सकती है। गर्भावस्था में तथा रक्तस्कन्दन-रोधी औषधि के साथ सावधानी से प्रयोग करें।

सोंठ (सूखी अदरक) कहाँ पाया जाता है?

अदरक भारत भर में — विशेषतः केरल, कर्नाटक तथा उत्तर-पूर्व में — उष्ण, आर्द्र जलवायु में उगाया जाने वाला प्रकन्द है।

सोंठ (सूखी अदरक) किन शास्त्रीय योगों में सम्मिलित है?

Trikatu.

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भावप्रकाश निघण्टु — हरीतक्यादि वर्ग
    विश्वभेषज, अर्थात् सार्वभौम औषधि, के रूप में प्रशंसित।
  • चरक संहिता — दीपनीय एवं त्रिकटु प्रकरण
    श्रेष्ठ पाचक द्रव्यों में उल्लिखित।

Modern research

  1. Efficacy of Ginger (Zingiber officinale) in Ameliorating Chemotherapy-Induced Nausea and Vomiting: A Systematic Review Update and Meta-Analysis (see source). Journal of the Academy of Nutrition and Dietetics (2019)

    A systematic review and meta-analysis finding ginger supplementation reduced chemotherapy-induced nausea and vomiting.

    View study doi:10.1016/j.jand.2019.06.009
  2. Efficacy of Oral Ginger (Zingiber officinale) for Dysmenorrhea: A Systematic Review and Meta-Analysis (see source). (2016)

    A meta-analysis reporting oral ginger reduced menstrual pain (dysmenorrhea) compared with placebo.

    View study doi:10.1155/2016/6295737

सुरक्षा एवं सावधानियाँ

सामान्यतः सुरक्षित; बड़ी मात्रा पित्त, व्रण अथवा रक्तस्राव बढ़ा सकती है। गर्भावस्था में तथा रक्तस्कन्दन-रोधी औषधि के साथ सावधानी से प्रयोग करें।

प्राप्ति स्थान

अदरक भारत भर में — विशेषतः केरल, कर्नाटक तथा उत्तर-पूर्व में — उष्ण, आर्द्र जलवायु में उगाया जाने वाला प्रकन्द है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शुण्ठी एवं ताज़े अदरक में क्या अन्तर है?

उन्हें पृथक् द्रव्य माना जाता है। ताज़ा अदरक (आर्द्रक) उत्क्लेश एवं कास में प्रयुक्त होता है; सोंठ (शुण्ठी) अधिक उष्ण एवं सान्द्र है, जो पाचन, सन्धि-शूल तथा अवरोध में प्रयुक्त होती है। योग निर्दिष्ट करते हैं कि कौन-सा, और बदलने से प्रभाव बदल जाता है।

शुण्ठी की मात्रा क्या है?

शुष्क प्रकन्द चूर्ण प्रतिदिन 1–2 ग्राम, मधु अथवा उष्ण जल के साथ। त्रिकटु के भीतर भोजन से पूर्व उस संयोग का 1–2 ग्राम। पाक-मात्रा हेतु कोई सीमा आवश्यक नहीं।

क्या अदरक वस्तुतः उत्क्लेश में सहायक है?

हाँ — सम्पूर्ण द्रव्यगुण में यह सर्वाधिक प्रमाणित दावों में से एक है, जिसे गर्भावस्था-जन्य, शल्योत्तर तथा यात्रा-जन्य उत्क्लेश में परीक्षणों का समर्थन प्राप्त है। अधिकांश परीक्षणों में प्रतिदिन 1–1.5 ग्राम मात्रा प्रयुक्त हुई है।

क्या गर्भावस्था में अदरक सुरक्षित है?

पाक तथा अल्प औषधीय मात्रा में यह प्रातःकालीन अस्वस्थता हेतु व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है और सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है, जिसे परीक्षणों का समर्थन भी है। प्रतिदिन लगभग 1 ग्राम तक रखें और अधिक मात्रा पर चिकित्सक से चर्चा करें।

क्या अदरक सन्धिवात में सहायक है?

शास्त्रीय परम्परा में यह आमवात तथा अस्थिसन्धिशोथ में प्रयुक्त होता है और मध्यम शूल-न्यूनन हेतु उचित आधुनिक प्रमाण भी हैं। प्रभाव क्रमिक है — दिनों नहीं, सप्ताहों की अपेक्षा रखें, और यह किसी योग के भीतर श्रेष्ठ कार्य करता है।

सोंठ किसे नहीं लेनी चाहिए?

अम्लपित्त, परिणामशूल अथवा शोथयुक्त आन्त्र-रोग वाले किसी भी व्यक्ति को, क्योंकि यह प्रबल उष्ण है। रक्त पतला करने वाली औषधि लेने पर चिकित्सकीय परामर्श लें, क्योंकि अदरक प्लेटलेट-क्रिया को प्रभावित करता है। शल्य-क्रिया से पूर्व सेवन रोक दें।

क्या प्रतिश्याय में अदरक की चाय अच्छी है?

हाँ, और यह उचित कारण से भारत का मानक गृह-उपाय है। ताज़ा अदरक, तुलसी तथा ठण्डा होने पर मिलाया गया मधु अवरुद्ध प्रतिश्याय के अनुकूल है। कफ घना हो तो काली मिर्च मिलाएँ।

इनका घटक: Trikatu

Consult a registered BAMS Vaidya Consult Us